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राज कुमार राकेश के कहानी संग्रह 'एडवांस स्टडी' पर उमा शंकर सिंह परमार की समीक्षा

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बेहतर भविष्य के नाम पर पूँजीवाद और उदारवाद का जो तिलिस्म हमारे देश में खड़ा किया गया अब उसकी पोल खुलने लगी है. इसके परिणामस्वरूप किसान आत्महत्याओं की तरफ अग्रसर हुए हैं. कर्मचारियों की नौकरियाँ खतरे में है और बेरोजगारों को रोजगार देने के नाम पर भयावह शोषण किया जा रहा है. साहित्यकारों ने वास्तविकता की जमीन पर खड़े हो कर इसका सशक्त विरोध कर अपनी जनपक्षधरता स्पष्ट कर दी है. राजकुमार राकेश ऐसी ही प्रतिबद्धता वाले कहानीकार हैं जो अपनी रचनाओं के मार्फत आम जनता के साथ खड़े हैं. अभी हाल ही में राकेश का एक नया कहानी संग्रह 'एडवांस स्टडी' प्रकाशित हुआ है. इस पर पहली बार के लिए एक समीक्षा लिखी है आलोचक उमाशंकर सिंह परमार ने. तो आइए पढ़ते हैं यह समीक्षा.             एडवांस स्टडी - नव उदारवाद-प्रतिरोध और प्रयोग उमा शंकर सिंह परमार   अमरीकी साम्राज्यवाद का पुराना स्वरूप जो कभी शक्ति के सहारे विकासशील देशों को बाजार की तरह प्रयोग करता था आज वही अमरीकी साम्राज्यवाद आर्थिक साम्राज्यवाद का स्वरूप धारण कर चुका है। विश्व पूँजी के इसी आर्थिक साम्राज्यवाद को नव...