संजीव जैन का आलेख 'द्वंद्वात्मक अंतर्विरोध एक अंतर्दृष्टि'
दुनिया को बदलने में विचारकों की एक बड़ी भूमिका रही है। कार्ल मार्क्स उन महानतम विचारकों में से एक है जिनके दर्शन ने इस दुनिया की तस्वीर को बदल कर रख दिया। मार्क्स ने द्वंद्वात्मकता को केन्द्र में रखते हुए चिंतन मनन किया और अपने विचार दुनिया के सामने रखे। आज कार्ल मार्क्स का जन्मदिन है। इस महान विचारक को याद करते हुए हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं संजीव जैन का आलेख ' द्वंद्वात्मक अंतर्विरोध एक अंतर्दृष्टि ' । इस आलेख को हमने ‘ धागा ’ व्हाट्सएप ग्रुप से साभार लिया है। आज कार्ल मार्क्स की जयंती है अतः हम आज उनके सबसे अधिक क्रांतिकारी सिद्धांत या अवधारणा को समझने का प्रयास करेंगे। मार्क्स ने जिस टूल का उपयोग अपने संपूर्ण लेखन में किया है वह द्वंद्वात्मकता। यह क्या है ? और कैसे यह एक वैश्विक सिद्धांत है ? यह जानने की मेरी एक कोशिश के रूप में यह लेख लिखा गया है। यह कोई अंतिम विश्लेषण नहीं है। यह इस सिद्धांत को समझने का एक प्रयास है। द्वंद्वात्मक अंतर्विरोध के अनेक और आयाम भी हो सकते हैं। संजीव जैन ...