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भुवनेश्वर की कहानी 'आजादी : एक पत्र'

  प्रेमचंद युग के बेहतरीन कहानीकारों में भुवनेश्वर का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।  भुवनेश्वर को अल्पकालिक जीवन मिला फिर भी उन्होंने लीक से अलग हट कर का साहित्य सृजन किया। भुवनेश्वर ने मध्य वर्ग की विडंबनाओं को कटु सत्य के प्रतिरूप में उकेरा। एकांकी, कहानी, कविता, समीक्षा जैसी कई विधाओं में भुवनेश्वर ने साहित्य को नए तेवर वाली रचनाएं दीं। एक ऐसा साहित्यकार जिसने अपनी रचनाओं से आधुनिक संवेदनाओं की नई परिपाटी विकसित की। प्रेमचंद जैसे साहित्यकार ने उनको भविष्य का रचनाकार माना था। इसकी एक ख़ास वजह यह थी कि भुवनेश्वर अपने रचनाकाल से बहुत आगे की सोच के रचनाकार थे। उनकी रचनायों में कलातीतता का बोध है, परन्तु आश्चर्यजनक रूप से यह भूतकाल से न जुड़ कर भविष्य के साथ ज्यादा प्रासंगिक नज़र आती हैं। ‘कारवां’ की भूमिका में स्वयं भुवनेश्वर ने लिखा है कि ‘विवेक और तर्क तीसरी श्रेणी के कलाकारों के चोर दरवाजे हैं”। उनका यह मानना उनकी रचनाओं में स्पष्टतया दृष्टिगोचर भी होता भी है। मनुष्य को वस्तु में बदलते जाने की जो तस्वीर उन्होंने उकेरी, वो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है। आइए ...

भुवनेश्वर की प्रख्यात कहानी 'भेड़िये'

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  भुवनेश्वर हिन्दी साहित्य में भुवनेश्वर (1910-1957) नाम के उम्दा कहानीकार हुए हैं। उनका पूरा नाम भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव था।  हालांकि उन्हें छोटा जीवन मिला लेकिन इसी अल्पावधि में उन्होंने कई उम्दा रचनाएँ हिन्दी साहित्य को प्रदान कीं। वे लीक से अलग हट कर लिखने वाले ऐसे लेखक थे जिन्हें उनकी रचनाओं के जरिए ही आसानी से पहचाना जा सकता है। उनकी कहानियां मध्य वर्ग के जीवन के कटु यथार्थ को सामने रखती हैं। प्रख्यात  कथाकार मुंशी प्रेमचंद भुवनेश्वर की कहानियों के खासे प्रशंसक थे और अपनी पत्रिका 'हंस' में भुवनेश्वर को नियमित रूप से प्रकाशित करते रहते थे। वह प्रलेस के प्रथम सम्मेलन म़े भी आमंत्रित थे। भुवनेश्वर को नयी कहानी का प्रणेता भी माना गया। उनकी एक चर्चित और मानीखेज कहानी है 'भेड़िए'। यह कहानी हँस के अप्रैल 1938 में प्रकाशित हुई थी। अगर हम अपने समय, समाज और परिप्रेक्ष्य को देखें तो यह कहानी आज भी प्रासंगिक लगती है। कैसे भेड़िए हर जगह आज भी घात लगाए बैठे हैं और लगातार आम आदमी का शातिर तरीके से पीछा कर रहे हैं। हम पहली बार फोन पर कालजयी कहानियों की एक श्रृंखला लगा...