अशोक भौमिक का आलेख 'वर्त्तमान सांस्कृतिक चुनौतियाँ और हस्तक्षेप की जरूरत सन्दर्भ : समकालीन भारतीय चित्रकला'
अशोक भौमिक चित्रकला के क्षेत्र में काम करने वाले अग्रणी लोगों में अशोक भौमिक का नाम प्रमुख है । चित्रों के माध्यम से समय, समाज और सत्ता के चेहरे को पहचानने की एक अनूठी कोशिश कर रहे हैं अशोक दा । अशोक दा ने वर्तमान सांस्कृतिक चुनौतियों के क्रम में हस्तक्षेप की जरुरत को समकालीन भारतीय चित्रकला के माध्यम से समझने की एक कोशिश की है । तो आइए पढ़ते हैं अशोक भौमिक का यह महत्वपूर्ण आलेख । वर्त्तमान सांस्कृतिक चुनौतियाँ और हस्तक्षेप की जरूरत सन्दर्भ : समकालीन भारतीय चित्रकला अशोक भौमिक भारतीय चित्रकला के हज़ारों वर्षों के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण दौर की शुरुआत शायद राजा रवि वर्मा ( 1846-1906) से ही शुरू होता है। भारतीय चित्रकला का मूल स्वरुप बीसवीं सदी के शुरुआत तक , धार्मिक कथाओं या राजा-बादशाहों की जीवनियों के चित्रण (इलेस्ट्रेशन) तक सीमित था। भारतीय कला के गौरवशाली काल के रूप में जिस मुग़ल कला की बात की जाती हैं वे मुख्यतः हम्ज़ानामा , बाबरनामा , जहाँगीरनामा आदि तमाम जीवनियों का चित्रण है , जिसका उद्देश्...