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हरे प्रकाश उपाध्याय की कविताएँ

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हरे प्रकाश उपाध्याय  फ्रेडरिक एंगेल्स की एक महत्वपूर्ण क्लासिकल किताब है "वानर से नर बनने में श्रम की भूमिका" The Part Played by Labour in the Transition from Ape to Man). यह निबंध मूल रूप से 1876 में लिखा गया था और बाद में एंगेल्स की पुस्तक "डायलैक्टिक्स ऑफ नेचर" (Dialectics of Nature) में शामिल किया गया। एंगेल्स ने तर्क दिया कि मानव विकास (Evolution) में केवल जैविक परिवर्तन ही नहीं, बल्कि 'श्रम' (Labour) भी मुख्य कारक रहा है। कहा जा सकता है कि श्रम ने ही मनुष्य की वास्तविक निर्मिति की। तमाम लोग तमाम तरह के काम आज भी करते रहते हैं। और इनके काम से ही हमारा जीवन आसान बन जाता है। औद्योगिक क्रान्ति को सफल बनाने में इन श्रमिकों की भूमिका को भला कैसे दरकिनार किया जा सकता है। इस औद्योगिक क्रांति ने मनुष्य के जीवन को आसान बनाया। लेकिन यह विडंबना ही है कि जिन मजदूरों के दम पर दुनिया की यह रौनक बनी हुई है वे मजदूर खुद तंगहाल जिंदगी व्यतीत करने के लिए विवाह हैं। वह औरों के लिए घर बनाते हैं लेकिन खुद आजीवन बेघर रह जाते हैं। वह औरों के लिए कपड़ा बुनते और सिलते हैं लेकिन...