निकानोर पार्रा की कविताएँ, अनुवाद: देवेश पथ सारिया
निकानोर पार्रा इस दुनिया की खूबसूरती है कि यह जानते हुए भी कि एक दिन सब कुछ नष्ट हो जाना है लोग अमर रहने के लिए तरकीबें लगातार खोजते रहते हैं। इसी क्रम में मुख्य रूप से शासक वर्ग अपने को अनंत काल तक स्मृति में बनाए रखने उम्मीद में अपनी मूर्तियां लगवाता रहता है और इसी तरह के अन्य बचकाने प्रयास करता रहता है। शासक वर्ग के समर्थक भी अपने आकाओं को खुश रखने के लिए प्रायः उनकी मूर्तियां प्रायः लगाते रहते हैं। लेकिन हकीकत तो यहीं है की अंततः एक दिन सब कुछ खत्म हो जाता है। निकानोर पार्रा की एक छोटी सी कविता ‘ राष्ट्रपति की मूर्ति नहीं बचेगी नहीं ’ इसकी उम्दा तरीके से तस्दीक करती है। निकानोर पार्रा चिली ही नहीं बल्कि ले टिन अमेरिका के सर्वाधिक चर्चित कवियों में से हैं। कवि होने के साथ - सा थ पार्रा गणितज्ञ भी हैं। इनका जन्म चिली में 5 सितंबर 1914 में हुआ था। इन्हें स्पेनिश भाषा के बड़े कवि का दर्जा दिया जाता है। ...