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चन्द्रभूषण का आलेख 'हिंदुत्व, के. एम. मुंशी, और ‘जय सोमनाथ’

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कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी  इतिहास फैशन का विषय नहीं है। यह कई बार हमें असहज करता है। हमारा अतीत काफी कुछ उन आक्रामकों से जुड़ा है जिन्होंने भारत को अपने आक्रमणों से तहस नहस करने का प्रयास किया। ऐसी स्थिति में धर्म वह आश्रय था जिसमें लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते थे। महमूद गजनवी का 1025 ई में सोमनाथ पर आक्रमण उसका सबसे भयावह आक्रमण था। कहा जाता है कि उसने इस हमले में बेहिसाब लूट पाट किया। सोमनाथ की इस लूट से महमूद को छह टन सोने के बराबर सम्पत्ति हाथ लगी। लूटे हुए धन के साथ वह ग़ज़नी लौट गया। भारत के आज़ाद होने के बाद नए सिरे से सोमनाथ मंदिर को बनाने की मुहिम शुरू हुई। भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल और केएम मुंशी की देखरेख में मंदिर की पुरानी भव्यता को रूप देने की कोशिश की गई।आज़ादी के तीन महीने बाद सरदार पटेल ने वहाँ का दौरा किया। वहाँ भाषण देते हुए उन्होंने कहा, "हमलावरों ने इस जगह का जो अपमान किया है। बीते दिनों की बात हो गई है। अब समय आ गया है कि सोमनाथ के पुराने वैभव को फिर से स्थापित किया जाए। अब ये पूजा का मंदिर मात्र नहीं रहेगा बल्कि संस्कृति और हमारी एकत...