कैम्पस में कविता
साहित्यिक गोष्ठियों का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि नए रचनाकारों को समकालीन साहित्य की अधुनातन एवं प्रगतिशील प्रवृत्तियों से न केवल परिचित कराया जाए बल्कि उनमें रचनात्मक प्रवृत्ति को भी बढ़ावा दिया जाए और उनके लेखन को बेहतर स्वरूप प्रदान किया जाए। इस क्रम में उनकी रचनाओं का पाठ कराते हुए उस रचना पर वरिष्ठ एवं समकालीन रचनाकारों द्वारा आलोचनात्मक पड़ताल कर उन्हें बेहतर लिखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। लिखावट फाउंडेशन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों के जरिए यह महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा है। लिखावट फाउंडेशन का एक महत्वपूर्ण प्रयास 'कैंपस में कविता' है जिसमें वह विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में जा कर रचना गोष्ठी आयोजित करने की पहल करता है। हाल ही में लिखावट फाउंडेशन और आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय धौलाकुंआ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 'कैंपस में कविता' का आयोजन किया गया। इस आयोजन की एक रपट ज्योति त्रिपाठी ने हमें उपलब्ध कराया है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं ज्योति त्रिपाठी की रपट 'कैम्पस में कविता'।
रपट
कैम्पस में कविता
प्रस्तुति : ज्योति त्रिपाठी
छात्र छात्राओं से खचाखच भरे सभागार में लिखावट फाउंडेशन और दिल्ली के धौला कुआं पर स्थित आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय में कल कैंपस में कविता के 30वे संस्करण में समकालीन कवियों का कविता पाठ संपन्न हुआ। आमंत्रित कवि थे - सुपरिचित कवि, कला और रंग समीक्षक और लिखावट फाउंडेशन के निदेशक मिथिलेश श्रीवास्तव, कवि, गद्यकार और पूर्व संपादक राकेश रेणु, कवयित्री और दलित चिंतक अनिता भारती, कवयित्री और आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय में हिंदी भाषा और साहित्य की प्रोफेसर रेणु बाला, कवि और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर दुर्गा प्रसाद गुप्त, कवि और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भाषा केंद्र में प्रोफेसर देवेंद्र चौबे, कवयित्री और दिल्ली विश्वविद्यालय में शोधार्थी ज्योति त्रिपाठी।
विभिन्न विभागों के विद्यार्थी कविता सुनने के लिए आये थे। उनका उत्साह देख कर आमंत्रित कवि लोग भी काफी उत्साहित हुए। कविता सुनने के लिए जो एकाग्रता चाहिए विद्यार्थियों में थी। बीच में आना जाना भी नहीं कर रहे थे। प्रोफ़ेसरों में श्रीधरन जी, अरविंद मिश्र जी, राज कुमार भगत जी, रामरतन प्रसाद जी, रेणु बाला जी, और बहुत सारे प्रोफेसर कविता पाठ के दौरान उपस्थित रहे। प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ) ज्ञानतोष कुमार झा जी काफी देर तक मौजूद रहे। उत्साहित एकाग्रचित सजग युवा छात्रों के बीच कविता पाठ करने का अद्भुत आनंद हुआ। युवा कवि की खोज के तहत कुछ छात्रों की कविताएं भी सुनी गईं - कान्ति उपाध्याय, प्रेरणा जोशी, गौरी तिवारी, अमित दहिया आदि। ज्योति त्रिपाठी शोधार्थी हैं। उनकी शोध निर्देशक हैं विवेकानंद महाविद्यालय की प्रोफेसर (डॉ) सरोज कुमारी जी जो कवयित्री भी हैं। ज्योति त्रिपाठी ने कविता-पाठ का संचालन किया।
पहला सत्र उद्घाटन सत्र था। दीप प्रज्वलित कर के कार्यक्रम की शुरुआत हुई। उस सत्र में राजभाषा हिंदी पर बातें हुईं। दूसरे सत्र में छात्रों की कविताएँ सुनी गईं। अवसर था राजभाषा पखवाड़े की शुरुआत एक सितंबर, 2026 के दिन। लिखावट फाउंडेशन और और राजभाषा प्रकोष्ठ,आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में समकालीन कविता पाठ का आयोजन तीन सत्रों में विभाजित किया गया।
पहला सत्र कार्यक्रम के उद्घाटन और राजभाषा हिंदी पर केंद्रित था। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ) ज्ञानतोष कुमार झा ने राजभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का इज़हार करते हुए कहा कि वे ख़ुद हिंदी भाषा और साहित्य के स्ट्रीम से हैं इसलिए।भी राजभाषा हिंदी उनकी विशेष प्राथमिकता है। कविता-पाठ के लिए आमंत्रित भारत सरकार में राजभाषा अधिकारी के रूप कार्यरत श्री अरुण चन्द्र राय ने हिंदी भाषा की भावी सम्भावनाओं पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को हिंदी भाषा से जुड़ने और हिंदी में शोधकार्य और अनुवाद कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा से जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया क्योंकि हिंदी में नौकरियों की अनेक संभावनाएं हैं। लिखावट फाउंडेशन ने जो पूर्व में लिखावट के नाम से अपनी स्थापना वर्ष 1988 से जाना जाता रहा की पहल पर “कैंपस में कविता” के 30 वें संस्करण की प्रस्तुति दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन महाविद्यालय के प्रांगण में हुई।
छात्र कवियों की खोज की कोशिश पर केंद्रित दूसरे सत्र में छात्र कवियों की कविताएं सुनी गईं। कान्ति उपाध्याय, प्रेरणा जोशी, गौरी तिवारी, अमित दाइया आदि की कविताओं को काफी पसंद किया गया। आमंत्रित कवि मिथिलेश श्रीवास्तव, राकेश रेणु, अनिता भारती, दुर्गा प्रसाद गुप्त, देवेंद्र चौबे, अरुण चंद्र राय और ज्योति त्रिपाठी का महाविद्यालय के अध्यापकों ने पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिन्ह दे कर औपचारिक स्वागत किया जिसके बाद कार्यक्रम का दूसरा सत्र शुरू हुआ।
इस दूसरे सत्र में युवा कवियों के काव्यपाठ का आयोजन किया गया जिसकी शुरुआत करते हुए लिखावट फाउंडेशन के निदेशक और कवि मिथिलेश श्रीवास्तव जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सुप्रसिद्ध कवि रघुवीर सहाय कहते थे कि उनका कविता-पाठ टिकट लगा कर आयोजित किया जाना चाहिए। रघुवीर सहाय की उस इच्छा को हम पूरा नहीं कर सके क्योंकि हमारी सोच में टिकट लगाना था ही नहीं। लेकिन उनका सपना हमारा सपना है और हमारी कोशिश होगी कि हम टिकट लगा कर कविता पाठ का आयोजन करें। उन्होंने छात्रों को सुझाव दिया कि वे विभिन्न विषयों की अच्छी किताबें अधिक से अधिक पढ़ें। कला-प्रदर्शनियां कला दीर्घाओं और राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय सरीखे संस्थानों में प्रदर्शित कला-प्रदर्शनियों को देखें। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सरीखे रंगमंच समूहों की रंगमंच प्रस्तुतियों को देखें। इससे आपकी सोच और आपके मानसिक क्षितिज का विस्तार होगा।
इसके बाद युवा कवि क्रांति ने अपनी बेहतरीन कविता प्रस्तुत की। जिसके बाद कवयित्री प्रेरणा ने स्त्री विमर्श की कविता प्रस्तुत कर के सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गौरी तिवारी ने भी अपनी कविता में मिठास घोलते हुए समाज की समस्याओं पर गहरा प्रहार किया। इसके बाद युवा कवि अमित दहिया और शुभम ने भी अपनी कविताओं की बेहतरीन प्रस्तुति की।
कवि देवेंद्र चौबे ने कहीं लिखा है कि छात्र कवियों की कवितायें समाकालीन धारा के पितृसत्ता, सम्प्रदायिकता, लोकतंत्र, हाशिये के समाज, यथार्थ जीवन में चेतना के प्रगतिशील पक्ष जैसे महत्वपूर्ण सवालों से जोड़ती हैं। ये सभी सवाल समकलीन इतिहास के भी सवाल हैं तथा भारतीय राष्ट्र को समझने में मदद करते हैं।यह एक महत्वपूर्ण बात है तथा यही सारी चीजें साहित्य की दुनिया का विस्तार करती हैं।
तीसरे सत्र में समकालीन कविता के महत्वपूर्ण आमंत्रित कवि मिथिलेश श्रीवास्तव, राकेश रेणु, दुर्गा प्रसाद गुप्त, अनिता भारती, देवेंद्र चौबे, अरुण चंद्र राय, रेणु बाला और ज्योति त्रिपाठी ने कविता-पाठ किया। मिथिलेश श्रीवास्तव ने अपने प्रकाशित होने वाले कविता संग्रह से तीन कविताओं का पाठ किया "'शोषण', 'कबूतर जैसा जीवन 'और 'एक दांत का गिरना'।" कवि मिथिलेश श्रीवास्तव जी ने अपनी कविताओं के माध्यम से ऐसा समां बांधा कि हर कोई बस सुनता ही रहा। उनकी कविताएं मात्र कविताएं नहीं मानो श्रोताओं से बात करती हुई प्रतीत हुई। रेणु जी ने अपनी कविताएं प्रस्तुत की, उनकी कविताएं समय के साथ संवाद करती है और मनुष्य तथा समाज के पक्ष में खड़ी दिखाई देती हैं।
स्त्री विमर्श और हाशिये के समाज की सशक्त रचनाकार अनिता भारती जी ने अपना काव्य-पाठ प्रस्तुत किया और समाज में स्त्रियों की स्थिति की सच्चाई सामने रखी। इस कार्यक्रम की खूबसूरती यह रही कि महाविद्यालय की प्रोफ़ेसर रेणु बाला जिन्हें सब आलोचक के रूप में जानते थे उनकी कविताओं को सुनने का मौका भी मिला। उन्होंने किसानों की समस्याओं पर कविता सुनाते हुए पूंजीपतियों और सत्ता पर गहरी चोट की। दुर्गा प्रसाद गुप्त जी की कविताओं से युवा कवियों को समकालीन कविताओं के साथ-साथ, भाषा पर उनकी गहरी पकड़ का भी एहसास हुआ। देवेंद्र चौबे जी ने अपनी कविता प्रस्तुत की और यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उनकी कविताओं में सामाजिक, राजनीतिक सच्चाई का आईना है और आईना दिखाने की जो हिम्मत एक रचनाकार में होनी चाहिए वो देवेंद्र चौबे जी में पूर्ण रूप से है। युवा कवयित्री ज्योति त्रिपाठी जिन्होंने कविता-पाठ के तीसरे सत्र का संचालन भी किया, ने अपनी स्त्री विमर्श की कविताओं का पाठ किया। यह भी बताना जरूरी है कि प्राचार्य महोदय की व्यस्तता की वजह से कविता-पाठ की अध्यक्षता राकेश रेणु ने किया। श्रीधरन जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।





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बहुत सुंदर रिपोर्ट।
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