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स्वप्निल श्रीवास्तव का आलेख 'मादक और इठलाती हुई आवाज का जादू'

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आशा भोंसले  आशा भोंसले के बिना हिन्दी फिल्मी गीतों की कोई भी कहानी अधूरी रहेगी। हालांकि आशा का जन्म संगीतकारों के परिवार में ही हुआ था। वे हृदय नाथ मंगेशकर की पुत्री थीं। लता मंगेशकर उनकी बड़ी बहन थीं लेकिन संगीत की दुनिया में पाँव जमाने के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। अपने जीवन की राह खुद चुनने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी और इसी क्रम में लता मंगेशकर से गायन के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा। दो शादियां की। और ओ पी नैय्यर के साथ लिविंग रिलेशन में रहीं, हालांकि उनसे शादी नहीं की। ओ पी नैय्यर ने आशा भोंसले के गायन को एक नया आयाम प्रदान किया। इस क्रम में उन्होंने अपनी फिल्मों में लता मंगेशकर से कभी गाना नहीं गवाया। आशा भोंसले ने शास्त्रीय गीतों के साथ साथ पॉप, कैबरे जैसे तेज संगीत भी सिद्धहस्तता के साथ गाए। स्वप्निल श्रीवास्तव अपने आलेख में लिखते हैं 'आशा भोंसले और ओ. पी. नैयर ने हिन्दी सिनेमा के दर्शकों को एक नये रस से परिचय कराया, जिसमें नटखटपन और मादकता साथ–साथ थी। इस तरह के गाने में एक नशा जैसा था। नौजवान दर्शक इस तरह के गीतों के आशिक थे। मेरे सनम का गीत याद करे – ये है रेशमी जुल...

आदित्य विक्रम सिंह का आलेख 'भारतीय संगीत परंपरा की जीवंत धरोहर है आशा भोंसले की गायकी'

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                        आशा भोंसले  भारतीय संगीत की जीवन्त आवाज थीं आशा भोंसले। बीते 12 अप्रैल 2026 को मुम्बई में 92 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। वे प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर की बहन थीं। हालांकि आशा जी ने अपने हुनर से गायन की दुनिया में अपनी एक अलग जगह बनाई। संगीतकार ओ. पी. नैयर की साझेदारी ने आशा भोसले को एक खास पहचान दिलाया। ओ. पी. नैयर और आशा भोसले की यादगार फिल्मों में ‘आईये मेहरबाँ...’ (हावड़ा ब्रिज-1958), ‘ये है रेशमी जुल्फो का अंधेरा... (मेरे सनम-1965) आदि है। ओ. पी. नैयर ने कई हिट गीतों को आशा जी के साथ रिकार्ड किया यथा- नया दौर (1957), तुम सा नहीं देखा (1957), हावड़ा ब्रिज (1958), एक मुसाफिर एक हसीना (1962), कशमीर की कली (1964) आदि। इनकी साझेदारी में गए कुछ मशहूर गीत हैं - आओ हुजुर तुमको...(किस्मत), जाईये आप कहाँ जाएगे... (मेरे सनम) आदि है। इनके द्वारा गाए कुछ प्रमुख युगल गीत हैं ‘उडे जब जब जुल्फे तेरी...(नया दौर), मै प्यार का राही हूँ...(एक मुसाफिर एक हसीना), दीवाना हुआ बादल..., इशारो इशारो में...(काश्मी...