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ठाकुर प्रसाद सिंह का निबन्ध 'वाराणसी : एक बहुत पुराना नया शहर'

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  ठाकुर प्रसाद सिंह  वाराणसी भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया के प्राचीनतम बसे शहरों में से एक अलबेला और अलमस्त शहर है। इसकी पुरातनता पर प्रकाश डालते हुए अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं: “बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों (लीजेन्ड्स) से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है।” इसे ‘बनारस’ और ‘काशी’ भी कहा जाता है। यह हिन्दू धर्म के सर्वाधिक पवित्र नगरों में से एक माना जाता है जो ऐसी मान्यता है कि शिव के त्रिशूल पर बसा हुआ है। इसे अविमुक्त क्षेत्र भी कहा जाता है। साथ साथ इसे आनंद-कानन, महाश्मशान, सुरंधन, ब्रह्मावर्त, सुदर्शन, रम्य, एवं काशी नाम से भी संबोधित किया जाता रहा है। इस शिव की नगरी माना जाता है। यही नहीं बौद्ध एवं जैन परम्परा में भी इसे पवित्र शहर माना जाता है। बौद्ध साहित्य में ही इसके अनेक नाम मिलते हैं। उदय जातक में सुर्रूंधन (अर्थात सुरक्षित), सुतसोम जातक में सुदर्शन (अर्थात दर्शनीय), सोमदंड जातक में ब्रह्मवर्द्धन, खंडहाल जातक में पुष्पवती, युवंजय जातक में रम्म नगर (यानि सुन्दर नगर), शंख जातक...