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प्रेमकुमार मणि का आलेख ''जीवन को उलट पलट दो' (अंतोन चेखब के जन्मदिन पर)।

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  दुनिया का हर मनुष्य आजाद रहना चाहता है। और दुनिया का हर रचनाकार चाहता है कि उसकी आजादख्याली पर कभी कोई प्रतिबन्ध न लगाया जाए। रचनाकार वैसे भी मन मिजाज से स्वतन्त्र होता है और अपनी रचनाओं के मार्फत वह आजादी की अलख जगाए रखता है। चेखब ने अपनी रचनाओं के माध्यम से इसी आजादी की जोरदार हिमायत की। इसकी वजह ये थी कि वे उस परिवार से आते थे जो अर्द्ध दास हुआ करता था। इन अर्द्ध दासों को रूस में 'सर्फ' कहा जाता था।  चेखब को जीते जी वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। लेकिन अन्ततः उनकी रचनाओं ने उन्हें दुनिया के श्रेष्ठ साहित्यकारों की पंक्ति में खड़ा कर दिया। भले ही उन्हें  अल्पकालीन साहित्यिक जीवन मिला लेकिन इसी अवधि में उन्होंने रूसी भाषा को चार कालजयी नाटक दिए जबकि उनकी कहानियाँ विश्व के समीक्षकों और आलोचकों में बहुत सम्मान के साथ सराही जाती हैं। चेखव अपने साहित्यिक जीवन के दिनों में ज़्यादातर चिकित्सक के व्यवसाय में लगे रहे। वे कहा करते थे कि चिकित्सा मेरी धर्मपत्नी है और साहित्य प्रेमिका। चेखव का प्रभाव अनेक रूसी लेखकों, बुनिन, कुप्रिन, गोर्की जैसे कालजई रचनाकारों पर पड़ा। य...

अन्तोन चेखव की अनुदित कहानी दुःख। (अनुवादक : सुशांत सुप्रिय)

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अन्तोन चेखव मनुष्य इसलिए भी और जीवधारियों से अलग है क्योंकि वह अपना दुःख अपनी खुशी एक दूसरे के साथ बाँटना चाहता है । परिचित हो या अपरिचित दुःख बाँट कर वह खुद को हल्का महसूस करने लगता है। लेकिन कभी-कभी लोगों में इतना बेगानापन दिखाई पड़ता है कि वे दूसरों की बातें बिल्कुल ही सुनना नहीं चाहते। रूस के महान कथाकार अन्तोव चेखव मनुष्य की संवेदनाओं को उकेरने वाले अनूठे कथाकार हैं। उनकी एक कहानी का अनुवाद किया है कवि और अनुवादक सुशान्त सुप्रिय ने। तो आइए आज पढ़ते हैं चेखव की अनुदित कहानी दुःख।             ( अनूदित रूसी कहानी)                           दुःख                                   मूल लेखक : अन्तोन चेखव अनुवाद : सुशांत सुप्रिय   " मैं अपना दुखड़ा किसे सुनाऊँ ?" शाम के धुँधलके का समय है। सड़क के खम्भों की रोशनी के चारों ओर बर्फ़ की एक गीली और मोटी परत धीरे-धीरे फैलती जा रही है।...