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प्रोफेसर रामदेव शुक्ल का आलेख 'भोजपुरी में भारत का देश-राग'

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  भोजपुरी का साहित्य समृद्ध साहित्य है। इसकी चिंताएं स्थानीय तो हैं ही, विस्तृत अर्थों में देखें तो ये अपने देस काल की चिंताएं भी हैं। इसकी अपनी खासियत है बिना लाग लपेट के सहज तरीके से अपनी बात को कह डालना। ग्रामीण जीवन की समस्याओं और विषमताओं से कवि चन्द्रदेव यादव भलीभांति वाकिफ हैं और इसीलिए इन पर अपने भोजपुरिया अंदाज में प्रहार भी करते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि चन्द्रदेव यादव भोजपुरी के समर्थ कवि हैं। दिल्ली में रहते हुए भी वे स्वाभाविक रूप से अपनी मूल भाषा भोजपुरी में ही रमते हैं। भोजपुरी में उनका पहला कविता संग्रह है 'देस राग'। इस संग्रह की एक विस्तृत पड़ताल की है रामदेव शुक्ल ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं चन्द्रदेव यादव के कविता संग्रह देस राग पर प्रोफेसर रामदेव शुक्ल का आलेख 'भोजपुरी में भारत का देश-राग'।  यह आलेख हमें रामदेव शुक्ल के प्रिय और चंद्रदेव यादव के साथी बलभद्र के सौजन्य से प्राप्त हुआ है। इसके लिए हम उनके आभारी हैं। 'भोजपुरी में भारत का देश-राग' रामदेव शुक्ल चन्द्रदेव यादव की भोजपुरी क‌विताओं का पहला संग्रह ‘देस-राग’ अपने देश...