आदित्य की कविताएं
आदित्य दुनिया की कोई भी तकनीक मनुष्य के लिए सुविधाएं ले कर आती है। लेकिन विडम्बना यह है कि आम आदमी इस तकनीक के उपयोग से प्रायः वंचित रहते हैं। रेल ने कष्टप्रद यात्राओं के दौर को खत्म कर आम आदमी के जीवन को सुविधाजनक बना दिया। इस क्रम में छोटी दूरी की रेल आम जन के लिए वरदान ही साबित हुई जिस पर टिकट वाले तो चढ़ते ही थे, वे भी इसका फायदा उठा लेते थे जो टिकट लेने की सामर्थ्य से वंचित होते थे। लोकल ट्रेन का वह सफर कई मायनों में जीवन के सफर के विविध आयाम को समेटे हुए होता। इसके कई शेड्स कहानियों और कविताओं में करीने से दर्ज किए गए। आदित्य की कविता 'बरहजिया' रेल के उस रोचक सफर को दर्ज करती है 'जिसके बारे किंवदन्तियाँ थीं/ कहीं भी रुक सकती थी, जिस पर कोई भी सवार हो सकता था/ टिकट बेटिकट।' आदित्य ने अपने अलग शिल्प के जरिए ध्यान आकृष्ट किया है। उनके यहां कोई बनावटीपन नहीं है बल्कि जीवन का वह राग है जिसका स्वर मद्धिम करने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। यह दुनिया केवल सुविधाभोगियों के लिए ही नहीं है बल्कि उनकी भी है जो जीवन के लिए रोजाना एक जंग लड़ते हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते...