नासिर अहमद सिकन्दर की कविताएँ
नासिर अहमद सिकन्दर हम जो जीवन जीते हैं, उसमें उन लोगों का बड़ा हाथ होता है जो स्वयं अपना जीवन जैसे तैसे जीने के लिए अभिशप्त होते हैं। वे दूर नहीं, बल्कि हमारे आस पास ही होते हैं। कई बार हम यह भूल जाते हैं कि वे भी ठीक हमारी ही तरह मनुष्य हैं और उनसे हिकारत के नजरिए से बात करते हैं। लेकिन वे सब कुछ भूल कर अपने जिद और जुनून में जुटे रहते हैं। कवि नासिर अहमद सिकन्दर ने ऐसे लोगों को शिद्दत से महसूस करते हुए लिखा ' बस आप/ घबरायें न बिल्कुल साहेब/ पूरा इत्मीनान रखें/ फिक्र न करें साहेब/ गर्मी है तो क्या हुआ/ हम भी तो हैं न साहेब/ बरसों से आपके खिदमतगार'। बीते 29 दिसम्बर 2025 को नासिर भाई का आकस्मिक निधन हो गया। पहली बार की तरफ से उन्हें नमन एवम हार्दिक श्रद्धांजलि। नासिर अहमद सिकन्दर के निकटस्थ कवि भास्कर चौधुरी ने उनके पहले कविता संकलन - "जो कुछ भी घट रहा है दुनिया में" से चयनित अपनी कुछ पसंदीदा कविताएँ पहली बार के लिए भेजी हैं। इसके लिए हम उनके आभारी हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं नासिर अहमद सिकन्दर की कविताए...