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कुमार वीरेन्द्र का आलेख 'पतियाइए कि रेणु इलाहाबाद में रहे थे'

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  इलाहाबाद कभी हिन्दी साहित्य की राजधानी हुआ करता था। इलाहाबाद की स्वीकृति के बिना बड़ा से बड़ा लेखक भी अधूरापन महसूस करता था। विख्यात लेखक फणीश्वरनाथ रेणु का रचनात्मक सम्बन्ध भी इलाहाबाद से रहा है। युवा आलोचक कुमार वीरेन्द्र ने बड़ी तफसील से इस सम्बन्ध को अपने इस शोधपरक आलेख में उजागर किया है। पहली बार की तरफ से रेणु शताब्दी वर्ष के सिलसिले में आयोजित आज की विशेष प्रस्तुति में पेश है कुमार वीरेन्द्र का आलेख ' पतियाइए कि रेणु इलाहाबाद में रहे थे। '     पतियाइए कि रेणु इलाहाबाद में रहे थे   कुमार वीरेन्द्र   कुछ लोग कुछ दिनों के लिए कुछ जगहों पर कुछ-कुछ ऐसे रहते-बसते हैं कि वे जगहें और उनका बहुत कुछ उन प्रवासियों को बेचौन किए रहती हैं। यह बेचैनी जीवन भर अंदर-अंदर धधकती-भभकती रहती है। चैन पाने की जद्दोजहद के बीच व्यक्ति उस जगह को बार-बार याद करता है , उसे उद्धृत करता है , उसे दुहराता है , उसे पुनः पुनः जीता है।   और जो इलाहाबाद ( प्रयाग) में रह गया और रह कर कहीं और चला गया , समझिए वह मुक्त हो ही नहीं सकता। इलाहाबाद रगों में प्रवेश कर ...