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मनीष चौरसिया की रपट 'प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूंज: 'चेतना के दस द्वीप'

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इलाहाबाद की ख्याति एक अरसे तक हिन्दी साहित्य की राजधानी के तौर पर रही है। एक से बढ़ कर एक दिग्गज साहित्यकार यहां की मिट्टी से निकले और साहित्य जगत में उन्होंने ख्याति अर्जित की। आज भी यहां अनेक ऐसे कवि हैं जिनके बिना हिन्दी कविता का कोई भी वृत्त पूरा नहीं। होता। प्रतिरोध की परम्परा यहां के मन मिजाज में है। गंगा जमुनी तहजीब यहां को धरोहर है। रणविजय सिंह सत्यकेतु ने इलाहाबाद के दस कवियों को ले कर एक किताब 'चेतना के दस द्वीप' सम्पादित की है जो न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन नई दिल्ली से प्रकाशित हुआ है। सत्यकेतु ने किताब की एक सुविचारित भूमिका लिखी है जिसमें उन्होंने यह बताया है कि इस किताब में 1967 से 1977 के बीच जन्मे ऐसे  कवियों की कविताओं का चयन किया गया है जो मूलतः कवि हैं और जिन्होंने इलाहाबाद से ही अपने लिखने का क्रम शुरू किया । आत्म कथ्य के साथ सभी कवियों की चुनिंदा पांच कविताएं भी दी गई हैं। इस किताब पर 27 जनवरी 2026 को एक बातचीत का आयोजन किया गया जिसकी विस्तृत रपट मनीष चौरसिया ने तैयार की है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं मनीष चौरसिया की रपट 'प्रयागराज की साहित्यिक विरासत औ...