यतीश कुमार की किताब की विभा रानी द्वारा की गई समीक्षा
सामान्यतया लेखन के लिए कुछ चीजें अनिवार्य होती हैं। ईमानदारी, प्रतिबद्धता, व्यापक अध्ययन, अनुभव और सोचे हुए को शब्दों में सहज और सरल तरीके से पिरो देना। किसी भी लेखक के लेखन में अगर ये सब तत्त्व हों तो उसका लेखन निश्चित तौर पर प्रभावी होगा। यतीश कुमार के लेखन में ये सभी चीजें दिखाई पड़ती हैं। अपने अतीत को याद करते हुए यतीश उन बातों को भी सामने रखने से नहीं चूकते जिससे सामान्य तौर पर कोई लेखक बचना चाहता है। 'लोग क्या कहेंगे' का कोई भय उनके यहां नहीं है। वे खुल कर अपनी बातें रखते हैं जिससे यह संस्मरण काफी प्रभावी बन पड़ा है। प्रभावी कुछ इस तरह कि इसे पढ़ते हुए किसी भी व्यक्ति को सहज ही अपने अतीत के संघर्षों की याद आ जाएगी। किसी भी किताब के लिए यह सबसे बड़ी सफलता होती है। विभा रानी ने यतीश कुमार के इस किताब पर एक पारखी नजर डालते हुए लिखा है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं यतीश कुमार के किताब की विभा रानी द्वारा की गई समीक्षा 'हम सबके अतीत की सैरबीन है बोरसी भर आंच' । हम सबके 'अतीत का सैरबीन' है- ‘बोरसी भर आंच’ विभा रानी अभी तो फिलहाल यह स्थिति है कि इस किताब...