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भगवान स्वरूप कटियार के कविता संग्रह 'शब्द स्तब्ध हैं' पर अवंतिका सिंह द्वारा लिखी गई समीक्षा

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कविता वस्तुतः मनुष्यता की भाषा है। कविता उम्मीद का अलख जगाये रखती है। कविता अपने आप में एक प्रतिवाद रचती है। इसीलिए कविता वह विधा है जिसमें दुनिया के सर्वाधिक लोग लेखन करते हैं। यह इसलिए कि कविता भरोसे की भाषा है। कवि  भगवान स्वरूप कटियार का मानना है कि  'कविता मनुष्य की मातृभाषा है। सही मायने में इंसान होने की पहचान ईमानदार और निडर होने के साथ साथ अन्याय के खिलाफ खड़ा होना है।' इस संग्रह की समीक्षा करते हुए अवन्तिका सिंह लिखती हैं 'यह काव्य संग्रह इसी साहस का दस्तावेज है।' आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं भगवान स्वरूप कटियार के कविता संग्रह 'शब्द स्तब्ध हैं' पर अवंतिका सिंह द्वारा लिखी गई समीक्षा 'कविता जब बोलती है'। कविता जब बोलती है! अवंतिका सिंह  जब अन्याय, अत्याचार, हिंसा, अराजकता का माहौल दिखाई देता हो। शोषण, लैंगिक असमानता, बेईमानी का दौर चलता हो। सच बोलना मुश्किल हो और भय का वातावरण दिखाई दे। ऐसे समय में बोलने का एकमात्र माध्यम है- कविता,  जो चुप्पी को तोड़ने और मनुष्य के पक्ष में निडरता से खड़े होने का साहस देती है।  कविता जब बोलती है तो वह अन्...