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महाराज कृष्ण संतोषी की कविताएँ

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कमल जीत चौधरी  मनुष्य के पास यह अद्भुत क्षमता है कि वह अपना ज्ञान और चातुर्य अपनी अगली पीढ़ी को हस्तांतरित करता रहता है। नई पीढ़ी इस ज्ञान से सुसज्जित हो कर अपने जीवन के साथ साथ अपने समय की दुनिया को बेहतर बनाने का प्रयास करती है। सभ्यता के विकास में मनुष्य का जो प्राथमिक हथियार था उसमें छड़ी रही होगी जो आगे चल कर लाठी में तब्दील हो गई होगी। इस लाठी को आज प्रतीकात्मक रूप में 'ईश्वर की लाठी' के रूप में स्वीकार करते हैं। गांधी जी ने भी एक लाठी का इस्तेमाल किया था। लेकिन यह लाठी 'सहारे की लाठी' या 'अहिंसा की लाठी' थी। इस लाठी ने उस समय के सबसे ताकतवर उपनिवेशवादी साम्राज्य का डंट कर सामना किया था और अपने उद्देश्यों में सफलता अर्जित की थी। समय बदलता रहता है। आज एक बार फिर जैसे हम पीछे की तरफ जा रहे हैं। हमारे समय में लाठी अब मरने मारने का हथियार बन चुकी है। हिंसा का जवाब हिंसा कतई नहीं हो सकती। हिंसा का जवाब अहिंसा ही होती है। इसका बेहतरीन उदाहरण गांधी जी प्रस्तुत कर चुके हैं। उनके विचार दुनिया भर में स्वीकार्य हैं। महाराज कृष्ण संतोषी अपनी एक बेहतरीन कविता लाठी में ...

महाराज कृष्ण संतोषी के काव्य संग्रह की मनोज शर्मा द्वारा की गई समीक्षा 'गणतंत्र में गौरया: जीने की नई वर्णमाला की इच्छा'

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महाराज कृष्ण संतोषी  कश्मीर का नाम लेते ही हमारे जेहन में अजीबोगरीब खयालात उभर आते हैं। जिसे कभी पृथ्वी का स्वर्ग कहा गया वह फिलहाल आतंकवाद, अराजकता, खून खराबे के जंजाल में उलझ कर रह गया है। वहां के मूल बाशिंदों को अपनी जन्मभूमि छोड़ कर निर्वासन में जीवन बिताने के लिए बाध्य होना पड़ा। महाराज कृष्ण संतोषी ऐसे ही कवि हैं जिनका जन्म तो कश्मीर में हुआ लेकिन निर्वासन में जम्मू का रुख करना पड़ा। जन्मभूमि से निर्वासित होना एक भयावह त्रासदी की तरह है। हालांकि अपनी कविताओं में वे इस त्रासदी पर विलाप नहीं करते बल्कि उस जद्दोजहद की बात करते हैं जो आमतौर पर एक व्यक्ति के हिस्से में ही होता है।  संतोषी जी का अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद से हाल ही में एक कविता संग्रह प्रकाशित हुआ है 'गणतंत्र में गौरैया'। इस संग्रह पर एक समीक्षा लिखी है कवि मनोज शर्मा ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  महाराज कृष्ण संतोषी के  कविता  संग्रह  गणतंत्र में गौरैया'  की मनोज शर्मा द्वारा की गई समीक्षा 'गणतंत्र में गौरया: जीने की नई वर्णमाला की इच्छा'। गणतंत्र में गौरया: जीने की नई वर्णमा...