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गरिमा श्रीवास्तव का आलेख "आधुनिक काव्यानुभूति और भक्ति का सौंदर्यशास्त्र: यतीन्द्र मिश्र की कविता 'पंढ़रपुर'"

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यतीन्द्र मिश्र भक्ति आन्दोलन का भारतीय साहित्य, संस्कृति और इतिहास में महत्वपूर्ण अवदान है। इस आन्दोलन ने बनी बनाई लीक को तोड़ने का कार्य किया। धर्म से जुड़े हो कर भी उसमें समाहित पाखंडों एवं अंधविश्वासों पर प्रहार करने का साहस दिखाया और इस तरह जनता के मन में उम्मीद की वह ज्योति भरी जो राजनीतिक परिस्थितियों के चलते निरन्तर धूमिल होती जा रही थी। गरिमा श्रीवास्तव लिखती हैं 'इस तरह भक्ति केवल एक व्यक्तिगत मोक्ष की आकांक्षा नहीं है, बल्कि वह एक सामूहिक कलात्मक उत्सव और इंद्रिय-बोध का विस्तार बन गई।... इसी समय कविता में अभंगों के 'चेतावनी देते बोल' उस सामाजिक चेतना को स्वर देते दिखाई पड़ते हैं जिसे मध्य काल में संत तुकाराम और ज्ञानेश्वर ने शुरू किया था।' वारकरी सम्प्रदाय का उद्भव दक्षिण भारत के 'पंढरपुर' नामक स्थान पर विक्रम संवत की तेरहवीं शताब्दी में हुआ था। इस सम्प्रदाय के प्रवर्तकों में संत ज्ञानेश्वर का स्थान महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने 'ज्ञानेश्वरी' और 'अमृतानुभव' नाम के दो महत्त्वपूर्ण ग्रंथों की रचना कर वारकरी सम्प्रदाय के सिद्धांतों को स्पष्ट क...