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क्षितिज जैन ‘अनघ’ की कविताएं

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क्षितिज जैन ‘अनघ’ जीवन को कविता में साकार करने का अहम काम करता है कवि। वैसे जीवन अपने आप में एक कविता ही है। इसलिए जीवन से जुड़ा कोई क्षेत्र ऐसा नहीं जो कविता के दायरे से बाहर हो। जीवन की जरूरतें कुछ इस तरह की होती हैं कि आदमी भीड़ में नजर आता है। लेकिन विडम्बना यही है कि आदमी भीड़ में भी वह अकेला होता है। जीवन को देखते समझते हुए आदमी जो करता है उसे कवि अपनी कविता के जरिए रेखांकित करता है। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं क्षितिज जैन अनघ की कुछ नई कविताएं। क्षितिज जैन ‘अनघ’ की कविताएं     नीली शर्ट मेट्रो और उपन्यास   नीली शर्ट फॉर्मल ऑफिस लुक के लिए पीछे लटका है बैग बन कर प्रतीक   उन सभी ज़िम्मेदारियों का   जिनका सहारा पा कर खड़ा होता है आदमी भीड़ से भरी मेट्रो में ऑफिस जाते हुए उस आदमी में सब कुछ वही सामान्य है जिसे हम देखते हैं   रोज़मर्रा की दौड़ लगाते हुए सिवाय छोड़ कर   हाथों में पकड़ी हुई एक किताब के एक पतली से किताब पतला सा उपन्यास जिसे पढ़ता हुआ वह ऑफिसमार्गी   खड़ा है जुदा ...