राकेश कुमार गुप्त का आलेख 'लोकतंत्र, असहमति और राज्य की संवैधानिक मर्यादा'
राकेश कुमार गुप्त लोकतन्त्र बहुदलीय पद्धति पर आधारित होता है। उसमें सत्ताधारी दल एक तरफ जहां सत्ता का दायित्व संभालता है वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल उसकी आलोचना प्रत्यालोचना करते हुए आईना दिखाने का काम करते हैं। लेकिन जब सत्ताधारी दल खुद को ही राष्ट्र समझने लगते हैं तब विपक्षी दलों के लिए दिक्कत उठ खड़ी होती है। सत्ताधारी दल की आलोचना को राष्ट्र की आलोचना समझ लेने पर यह दिक्कत उठ खड़ी होती है। हाल ही में जेन जी के जंतर मंतर पर प्रदर्शन ने जहां सत्ताधारी दल के लिए पहली बार गम्भीर चुनौती प्रस्तुत की वहीं युवाओं की भाषा को ले कर पक्ष विपक्ष में विचार व्यक्त किए गए। यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सरकारें बहुमत से बनती हैं, पर संविधान केवल बहुमत का नहीं होता; वह प्रत्येक नागरिक का होता है। असहमति का अधिकार लोकतन्त्र की रीढ़ होता है और इसी रीढ़ पर इसका समूचा ढांचा टिका होता है। उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के अधिवक्ता राकेश कुमार गुप्त ने जेन जी के इस प्रदर्शन को संवैधानिक आधार पर परखने की कोशिश की है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं राकेश कुमार गुप्त का आलेख 'लोकतंत्र, असहमति और राज्य की संवै...