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ध्रुव हर्ष की कविताएँ

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  ध्रुव हर्ष  ओरिगामी कागज मोड़ने की जापानी कला है। जापान में सारस पक्षी को सौभाग्य, लंबी उम्र और शांति का प्रतीक माना जाता है।वहाँ एक मशहूर परंपरा भी है, जिसे 'सेंबाज़ुरु' (Senbazuru) कहते हैं। प्राचीन जापानी परम्परा में कहा गया है कि सारस अच्छे भाग्य और दीर्घायु का प्रतीक हैं और यदि कोई एक हज़ार कागज़ के सारस मोड़ता है, तो उसकी इच्छा पूरी हो जाती है।  Sadako Sasaki एक 12 वर्ष की लड़की थी जो हिरोशिमा में, अपने घर के पास बम गिरने के कारण विकिरण प्रेरित ल्यूकेमिया से पीड़ित हो गई और अंत में दस साल बाद, 1955 में मृत्यु को प्राप्त हो गईं । उनकी कहानी ने दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरित किया है और उनकी स्मृति ने ओरिगेमी सारस को शांति और आशा के एक अंतरराष्ट्रीय प्रतीक में बदल दिया है। अक्टूबर 1954 में सदाको के लिम्फ नोड्स में सूजन आ गई, जिसके निदान के दौरान उन्हें पता चला कि उसे विकिरण के कारण होने वाला ल्यूकेमिया हो गया है। रोग तेज़ी से बढ़ता गया। एक महीने बाद ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। यद्यपि सदाको जानती थीं कि उसकी हालत अच्छी नहीं थी, लेकिन वह मरना नहीं चाहती ...

ध्रुव हर्ष की कविताएं

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  ध्रुव हर्ष  परिचय:  ध्रुव   हर्ष फिल्मकार, लेखक और कवि जन्म 1989, मनकापुर, गोंडा, (उत्तर प्रदेश) शिक्षा : डी. फिल (अंग्रेज़ी) इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद से “महाभारत और समकालीन उपन्यासों पर।” वर्तमान समय में आई.सी.एस.एस.आर., नई दिल्ली में रिसर्च फेलो हैं, और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली से “महाभारत में न्याय की अवधारणा” विषय पर ‘पोस्ट डॉक्टरेट’ कर रहे हैं।  कृष्ण की यह विशेषता है कि वे हमारे सामने एक मिथकीय चरित्र की तरह आते हैं और वास्तविक चरित्र की तरह दिलो दिमाग में बस जाते हैं। यह चरित्र इतना आम हो जाता है कि कवि रसखान उनके बारे में अपने एक सवैये में लिखते हैं  - 'ताहि अहिर की  छोहरियाँ  छछिया भरी छाछ पे नाच नचावै।'  ईश्वर के बारे में एक सामान्य अवधारणा यह है कि वह सर्व शक्तिमान होता है। आमतौर पर ईश्वरीय यानी सामर्थ्यवान होते हुए भी कृष्ण किसी भी घटना को टालने का प्रयास नहीं करते। सब कुछ यथावत यानी प्रकृति के अनुरूप चलता रहता है। ध्रुव हर्ष कवि के साथ-साथ फिल्मकार भी हैं। इसीलिए उनकी कविताएं सिनेमेटिक प्रभाव लिए हुए लगती है...