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एस आर हरनोट की कहानी 'बिल्लियां बतियाती हैं'

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एस आर हरनोट ‘ बिल्लियां बतियाती है ' हरनोट की एक बहु-चर्चित कहानी है जो वर्ष 1995 में ' पहल ' में छपी थी और आज तक चर्चा में बनी हुई है। यह कहानी वर्ष 2001 में छपे उनके बहुचर्चित कहानी संग्रह ‘ दारोश तथा अन्य कहानियां ‘ में संकलित है। यह संकलन आधार प्रकाशन प्रा0 लि0 से छपा है। इस संग्रह को पहले ‘ अन्तर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान ' और बाद में हिमाचल साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला। संग्रह का आधार से ही दूसरा संस्करण प्रकाशित हो गया है। इस कहानी के अंग्रेजी सहित गुजराती , मराठी , मलयालम सहित कई भाषाओं में अनुवाद हो चुके हैं। शिमला की एक नाट्य संस्था ने इस कहानी का नाट्य-अनुवाद कर इसके प्रदेश और प्रदेश से बाहर कई मंचन भी किए हैं। तो आइए पढ़ते हैं हरनोट की यह चर्चित कहानी ‘बिल्लियाँ बतियाती हैं । ’   बिल्लियां बतियाती हैं एस आर हरनोट अम्मा का झगड़ा शुरू हो गया है। अपने आप से। दियासलाई की डिब्बिया से। ढिबरी से। चूल्हे में उपलों के बीच ठूंसी आग से और बाहर-भीतर दौड़ती बिल्लियों से। यही सब होता है जब अम्मा उठती है। वह चार बजे के आसपास जागती है। ओबरे ...