विपिन चौधरी की हरियाणवी कविताएँ
विपिन चौधरी किसी भी रचनाकार के लिए उसकी देशजता सबसे अहम होती है । अपनी रचनाओं के लिए खाद-पानी वह वहीँ से आजीवन जुटाता है । अपनी देशज बोलियों के ऐसे शब्द जिनका अक्स दूसरी बोलियों में प्रायः नदारद होता है, अपनी कविताओं में ला कर न केवल कविताओं की जमीन को पुख्ता करता है, बल्कि देश-दुनिया को भी एक नए शब्द की आभा से परिचित कराता है । हाल ही में अपने एक साक्षात्कार में कवि केदार नाथ सिंह ने कहा था कि मेरी एक इच्छा है कि मेरा एक कविता संग्रह मेरी देशज भाषा भोजपुरी में आए । लेकिन यह अभी तक संभव नहीं हो सका है । संयोगवश हमारे युवा साथी अपनी देशजता के प्रति सजग हैं । विपिन चौधरी हिंदी कविता में आज एक सुपरिचित नाम है । कविताओं के साथ-साथ विपिन कहानियाँ और अनुवाद के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं । आज हम आपको विपिन की उन हरियाणवी कविताओं से परिचित करा रहे हैं जो उनकी अपनी बोली-बानी है । जिसमें वे बेझिझक अपने को व्यक्त कर अपनत्व महसूस करती हैं. तो आइए पहली बार पर पढ़ते हैं विपिन चौधरी की कुछ हरियाणवी कविताएँ । विपिन चौधरी की हरियाणवी कविताएँ...