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अमरकांत की कहानी 'हत्यारे'

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अमरकांत  भारत के गाँव कई मामलों में आज भी अलग किस्म के हैं। पिछड़ापन उनकी नियति है और गप्प हांकना अधिकांश ग्रामवासियों का स्वभाव। इस गप्प में हास्य व्यंग्य का बारीक पुट भी रहता है। अमरकांत पूर्वांचल के उस बलिया जिले से आते हैं, जहां ये बातें आम हैं। 'हत्यारे' अमरकांत की चर्चित कहानी है। इस कहानी में दो गपोड़ों के बीच बातचीत को व्यंग्य के जरिए अमरकांत प्रस्तुत करते हैं जिसमें वे भारतीय राजनीति के विद्रूप को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं। भारत अभी आजाद ही हुआ था और जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में इस नव स्वतन्त्र देश की बुनियाद रखी जा रही थी। लेकिन इसी समय से भ्रष्टाचार का घुन भारतीय राजनीति में प्रवेश करने लगा था। कहानी का एक चरित्र गोरा कहता है 'नेहरू हाथ पकड़ कर रोने लगा। बोला, “आज देश भारी संकट से गुज़र रहा है। सभी नेता और मंत्री बेईमान और संकीर्ण विचारों के हैं। जो ईमानदार हैं, उनके पास अपना दिमाग़ नहीं है। मेरी लीडरशिप भी कमज़ोर है। मेरे अफ़सर मुझको धोखा देते हैं। जनता की भलाई के लिए मैंने पाँच साला योजनाएँ शुरू कीं, लेकिन ब्लाकों के सरकारी कर्मचारी अपने घरों को भरने में...