आशुतोष यादव की कविताएं
आशुतोष यादव प्रकृति की सबसे खूबसूरत इनायत है मिट्टी। वही मिट्टी जिसमें हम पलते बढ़ते हैं। वही मिट्टी जिसमें फसलें लहलहाती हैं और जिसमें वृक्ष झूमते हैं। मिट्टी से मनुष्य का सनातन और पवित्र रिश्ता है। कवि अपनी कविताओं में इसी मिट्टी की बात करते हैं जिसमें अपनेपन का सोंधापन मिला होता है। इसी मिट्टी से आसमान भी खूबसूरत दिखता है। इसी मिट्टी पर पाँव टिकते हैं। आशुतोष यादव ने अपनी कविता ' तुम सफेद कागजों को काला मत करना ' में इसी मिट्टी को शिद्दत से याद करते हैं। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं आशुतोष यादव की कुछ नई कविताएँ। आशुतोष यादव की कविताएं प्रवासियों के घर द्वार कच्ची दीवारें भूल चुकी हैं लीपने वाली उगलियों की छाप आंगन में सिर उठाये खड़े हैं घुसपैठिये बेर, बबूल और आक देहरी को जकड़ चुका है एक दबंग पीपल अभाव के कब्जों पर एक मौसमी जंग में हार मान कर झूले पड़े हैं खिड़कियों के पल्ले दरवाजों को किसी तरह साधे है चौखट चौखट को एक घुटना टेक दीवार ...