सरला माहेश्वरी की कविताएं
कवि कर्म दूर से चाहें जितना आसान दिखाई पड़ता हो, यह उतना आसान होता नहीं। कवि के सामने चुनौती होती है कि वह अपने समय के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक मुद्दों से टकराते हुए, खुद को उससे जोड़ते हुए ऐसे लिखे कि वह सार्वजनीनता का भाव लिए दिखाई पड़े। और अगर कवि एक्टिविस्ट हो तो उसकी लेखनी और प्रभावी बन पड़ती है। कवि की वैचारिकी उसे और पुख्ता बनाती है। सरला माहेश्वरी ऐसी ही कवयित्री हैं, जो एक्टिविस्ट तो हैं ही, उनकी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता भी है। इसीलिए उनकी चिन्ता के केन्द्र में वह राजनीति है जो तमाम छल छद्मों से भरी हुई है और निर्मम है। जिनके लिए नैतिकता का कोई मूल्य नहीं। वे गज़ा के उन बच्चों के लिए चिन्तित हैं जिनका युद्ध ने सब कुछ छीन लिया है और दुनिया मूकदर्शक बने केवल तमाशा देख रही है। हाल ही में सूर्य प्रकाशन मन्दिर बीकानेर से उनका एक नया कविता संग्रह 'ओ शरद के चांद' प्रकाशित हुआ है। इसी संग्रह की कुछ कविताएं आज हम पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। सरला माहेश्वरी की कविताएं फ़लस्तीन के बच्चों के लिये दीपावली पर दुआ फ़लस्तीन के बच्चों के लिये दीपा...