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अन्तोन चेख़फ़ की कहानी 'कमजोर'

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दुनिया मूलतः दो किस्म के लोगों में बंटी हुई है। कमजोर और ताकतवर। इन्हें ही हम शोषित और शोषक भी कह सकते हैं। इनके बीच का संघर्ष लगातार चलता ही रहता है। कमजोर होने के बावजूद इस वर्ग के लोग अपना जज्बा बनाए रहते हैं। इनके यहां मनुष्यता बची होती है। इसके उलट ताकतवर प्रायः अपना विवेक खो देता है और सही मायनों में मनुष्य भी नहीं रह जाता। मनुष्य बनना इतना आसान भी कहां होता है?  अन्तोन चेख़फ़ दुनिया के अप्रतिम कहानीकारों में अग्रणी कथाकार हैं। उनकी एक प्रख्यात कहानी है 'कमजोर'। इस कहानी का रूसी भाषा से हिन्दी में अनुवाद किया है कवि अनिल जनविजय ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं अन्तोन चेख़फ़ की कहानी 'कमजोर'। कमजोर    अन्तोन चेख़फ़  (अनुवाद : अनिल जनविजय) हाल ही में मैंने अपने बच्चों की अध्यापिका यूलिया वसिल्येव्ना को अपने दफ्तर में बुलाया। मुझे उनसे उनके वेतन का हिसाब-किताब करना था। मैंने उनसे कहा, 'आइए... आइए... बैठिए। आपको पैसों की जरूरत होगी, पर आप इतनी संकोची हैं कि जरूरत होने पर भी आप खुद पैसे नहीं मांगेंगी। खैर... हमने तय किया था कि हर महीने आपको तीस रुबल दिए जाएंगे।...

प्रेम कुमार मणि का संस्मरणात्मक आलेख 'तलस्तोय, चेख़फ़ और गोरिकी'।'तलस्तोय, चेख़फ़ और गोरिकी

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'तलस्तोय, गोरिकी और चेख़फ़ रूस ने दुनिया को बोल्शेविक क्रान्ति के साथ साथ एक से बढ़ कर एक अप्रतिम साहित्यकार दिए हैं। यह विश्वास कर पाना ही रोमांच से भर देता है कि एक समय वहाँ पर तलस्तोय , चेखफ़ , और गोरिकी (गोर्की) जैसे रचनाकार थे जिनका आपस में संवाद भी था। इन सभी ने अपनी रचनाओं में रूस की तत्कालीन परिस्थिति और जार के तानाशाही शासन की आलोचना की। ऐसा माना जाता है कि बोल्शेविक क्रान्ति घटित होने में गोरिकी की   क्लासिकल कृति ' मदर ' का भी बड़ा हाथ था। तलस्तोय और चेखफ़ की कृतियाँ पढ़ कर लोग आज भी चकित रह जाते हैं। उनके सूक्ष्म ब्यौरे पढ़ कर हम यह महसूस करते हैं कि इस विषय या चीज को ले कर इस तरह भी सोचा जा सकता है। दुनिया के तमाम रचनाकार दृष्टि की इस बारीकी से आज भी सबक लेते हैं। प्रेम कुमार मणि हमारे समय के गम्भीर विचारक और अध्येता हैं। साहित्य , संस्कृति और समकालीन मुद्दों पर उनका हस्तक्षेप हम फेसबुक पर पढ़ते रहते हैं। उन्होंने इन तीनों रचनाकारों को ले कर एक आलेख लिखा है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है प्रेम कुमार मणि का संस्मरणात्मक आलेख ' तलस्तोय , चेख़फ़ और ग...