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परांस-10 : कुंवर शक्ति सिंह की कविताएँ

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कमल जीत चौधरी  इस दुनिया में जितने भी व्यक्ति हैं सभी में असाधारणता है। भले ही वे साधारण दिखें, लेकिन उनका हुनर, उनकी खूबी अपनी होती है। साधारण होने का भले ही दिखावा कर लिया जाए, साधारण होना आसान नहीं होता। इन लोगों में से कोई एक कौटिल्य निकल आता है, इनमें से कोई एक आर्यभट्ट हो जाता है। इनमें से कोई एक 'सेव पेड़ से नीचे ही क्यों गिरा, आसमान में क्यों नहीं उड़ गया' जैसे हास्यास्पद से लगने वाले सवाल से दुनिया को बदल देने वाले एक सिद्धांत की खोज कर डालता है। कुंवर शक्ति सिंह के शब्दों में कहें तो ये लोग कमाल के होते हैं। ये वे कमाल के लोग हैं जिन्होंने इस दुनिया को बेहतर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है कुंवर शक्ति सिंह अपनी कविता में लिखते हैं : 'कमाल कमाल के लोग/ तुम्हारे घर के पीछे/ पार्क में टहल रहे होते हैं/ फुटपाथ पर बिछी दुकानों पर/ किताबें बीन रहे होते हैं/ कमाल-कमाल के लोग/ फैज़, नेरुदा, रजनीश को जब चाहें/ नींद से उठा लेते हैं/  यह कमाल-कमाल के लोग/ कहीं सुदूर/  जंगली फूल चुन रहे होते हैं।' इस बार के परांस के हमारे कवि यही कुंवर शक्ति सिंह हैं। अप्रैल 20...