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रजनीश कुमार मिश्र की ग़ज़लें

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  रजनीश कुमार मिश्र साहित्य की खूबी यह है कि यह हमेशा उस इंसानियत की बात करता है जिससे ऊंचा कुछ भी नहीं है। मुक्तिबोध ने बांग्ला कवि चंडीदास की इन पंक्तियों को  अपने एक लेख में उद्धृत किया है : 'शुनह मानुष भाई/ शबार उपरे मानुष शत्तो/ ताहार उपरे नाई!' (हे मनुष्य भाई, सुनो! मनुष्य सत्य सर्वोपरि है, उसके ऊपर कोई सत्य नहीं है।) रजनीश कुमार मिश्र अपनी गजलों में इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दिखाई पड़ते हैं। वे लिखते हैं ' मकान भी जले हैं, दुकानें भी लुटी है बहुत/  इन्सानियत भी मरी है, नफरत की बरसात के बाद।' वाकई किसी भी तरह की नफरत से आहत होती है तो यह इंसानियत ही। क्या हम एक ऐसा समाज नहीं बना सकते जिसमें नफरत के लिए कोई जगह न हो।  पिछले महीने हमने इनकी कुछ गजलें पढ़ी थीं। एक बार फिर हम इनकी गजलों से रू ब रू होते हैं। धीरे धीरे रजनीश जी की लेखनी परवान चढ़ने लगी है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं रजनीश कुमार मिश्र की गजलें। ' रजनीश कुमार मिश्र की गजलें 1 उम्र की दहलीज लाँघ जाने की कभी हिम़ाकत मत करना दर्द अगर अपनों सेे मिला हो तो कभी शिका यत म...

शिवदयाल का आलेख 'टोकरी में दिगन्त: स्त्रीवाद का काव्यमय भारतीय पाठ'

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  कुछेक अपवादों को छोड़ कर पुरातन काल से ही स्त्री जीवन की अपनी व्यथा कथा रही है। वे इस व्यथा कथा के साथ ही अपना अस्तित्व आज तक बनाए बचाए हुए हैं। पुरुष समाज उन्हें वह प्रतिष्ठा देने से हमेशा कतराता रहा, जिसकी वे हकदार हैं। छठीं शताब्दी ई पू में गौतम बुद्ध ने धम्म का उदघोष किया। यह उदघोष बदलाव का था। नूतनता इसके मूल में थी। जो बुद्ध शुरू में ही स्त्रियों के संघ में प्रवेश को ले कर आशंकित थे, उन्होंने ही संघ में स्त्रियों के प्रवेश को स्वीकार किया। अनामिका का एक संग्रह थेरी गाथाओं पर केन्द्रित है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में स्त्रियों की स्थिति को जानने, परखने और समझने के सन्दर्भ को अनामिका के ‘टोकरी में दिगंत’ को  पढ़ा जा सकता है। शिवदयाल जी ने अपने आलोचनात्मक आलेख में उचित ही लिखा है कि 'इतना तो निश्चय ही कहा जा सकता है कि यह टोकरी जिसमें दिगंत कवयित्री ने रखा है, वह वास्तव में लोकतंत्र की ही सुलभ कराई है।' आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं शिव दयाल का आलोचनात्मक आलेख 'टोकरी में दिगन्त: स्त्रीवाद का काव्यमय भारतीय पाठ'।           'टोकरी में दिगन्त: स्त्रीवाद क...

भगत सिंह का आलेख धर्म और हमारा स्वतन्त्रता संग्राम'

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  कोई भी लड़ाई चिन्तन और वैचारिक प्रतिबद्धता के बगैर नहीं लड़ी जा सकती। अमरीकी क्रान्ति हो या फ्रांस की क्रान्ति, बोलशेविक क्रान्ति हो या फिर भारत का स्वाधीनता आन्दोलन इन सबमें एक बात जो समान रूप से सब पर लागू होती है, वह है कि इसके पुरोधा वैचारिक रूप से परिपक्व थे। भगत सिंह एक प्रतिबद्ध क्रान्तिकारी थे। उनके अपने उसूल थे, जिससे वे कभी डिगे नहीं। भगत सिंह बहुत पढ़ाकू थे। समय समय पर वे अपने विचार लेख के रूप में समकालीन पत्र पत्रिकाओं में व्यक्त करते रहते थे। धर्म  ऐसा ही एक मसला है, जो उस समय भारतीय स्वाधीनता संग्राम को भी गहरे तौर पर प्रभावित कर रहा था। इसी क्रम में धर्म पर अपने विचार प्रकट करते हुए भगत सिंह ने स्पष्ट रूप से लिखा 'हमारी आजादी का अर्थ केवल अंग्रेजी चंगुल से छुटकारा पाने का नाम नहीं। वह पूर्ण स्वतंत्रता का नाम है जब लोग परस्पर घुल-मिल कर रहेंगे और दिमागी गुलामी से भी आजाद हो जायेंगे।' भगत सिंह का यह आलेख किरती' नामक पत्र के मई, 1928 संस्करण में प्रकाशित हुआ था। शहीदी दिवस पर नमन करते हुए आज हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं भगत सिंह का आलेख 'धर्म और हमार...

आशीष कुमार का आलेख 'गुमनाम किरदारों ने दिए हैं सितारों को उनके नाम'

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  दुनिया में आम तौर पर दो तरह के लोग होते हैं। एक वे जिनके बारे में सब जानते समझते हैं, और जिनकी सामाजिक पहचान या वर्चस्व है। दूसरे वे जो होते हुए भी उपेक्षित हैं। जिनकी सत्ता को समाज द्वारा हास्यास्पद बना दिया गया और जो अपने अस्तित्व के लिए आज भी संघर्षरत हैं। थर्ड जेंडर ऐसा ही वर्ग है जो समाज द्वारा उपेक्षित किए जाने के बावजूद अपने अस्तित्व को आज भी बचाए हुए हैं। हमारा समाज इन्हें परिष्कृत रूप से किन्नर कहता है तो भदेस रूप से इन्हें हिजड़ा या छक्का कहा जाता है। हिन्दू परम्परा में परंपरागत रूप से सप्त ऋषियों, पंच कन्याओं को स्मरण करने की परंपरा रही है लेकिन इनका जिक्र जहां भी हुआ, बेचारगी के तौर पर ही हुआ। यह सुखद है कि वैचारिक तौर पर अब इनके बारे में भी खुल कर बातें होने लगी हैं। साहित्य से ले कर फिल्मों तक का विषय यह थर्ड जेंडर बनने लगा है।  आशीष कुमार युवा आलोचक हैं। कम लिखते हैं, लेकिन जब भी लिखते हैं, जम कर या कह लें रम कर लिखते हैं। लिखते समय वे विषय में उतर कर लिखते हैं इसीलिए इनका लेखन गंभीर होता है। वे झूठी तारीफ नहीं करते। कोई बेबाक ही यह बात लिख सकता है कि 'थर्ड जे...