संदेश

विमलेश त्रिपाठी का आलेख रेणु की कहानी पर बनी फिल्म संवदिया के बहाने कुछ बेतरतीब बातें

चित्र
      फिल्म का साहित्य से गहरा नाता रहा है। यह अलग बात है कि फिल्मों के साहित्य से सामंजस्य स्थापित कर पाने की कोशिश अक्सर विवाद का विषय रही है। जहां साहित्य अनंत आकाश की ऊंचाइयां भर सकता है वहीं फिल्मों की अपनी कुछ फिल्मगत सीमाएं भी होती हैं। फिल्मकार जनता की रूचियों और साहित्य के बीच एक सेतु बना कर चलने का काम किया करता है। इसीलिए वह किसी भी रचनाकार की कहानी या उपन्यास पर फिल्म बनाते समय ज्यों का त्यों नहीं चल पाता और यही साहित्यकारों की फिल्मकारों से शिकायत भी होती है कि वह कहानी को अपने अनुसार बदल लेते हैं। बहरहाल ऋतेश पांडे ने हाल ही में प्रख्यात उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु की कहानी 'संवदिया' पर एक फिल्म बनाई है। इस फिल्म में कवि कहानीकार विमलेश त्रिपाठी ने भी एक छोटी भूमिका निभाई है। विमलेश त्रिपाठी ने खुद को अलग करके इस फिल्म को देखने की एक निर्मम कोशिश की है और इसी क्रम में यह समीक्षा लिखी है। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं विमलेश त्रिपाठी का आलेख 'रेणु की कहानी पर बनी फिल्म संवदिया के बहाने कुछ बेतरतीब बातें'। रेणु की कहानी पर बनी फिल्म संवदिया के बहाने कुछ बेत...

अदनान कफील दरवेश के कविता संग्रह 'ठिठुरते लैंपपोस्ट' पर आशीष सिंह का आलेख 'मेरा सामान्य व्यवहार इस लोकतंत्र में गड़बड़ा गया है'

चित्र
  अदनान कफील दरवेश   भारत का विभाजन उसके इतिहास का एक त्रासद अध्याय है। इस विभाजन के शिकार करोड़ों लोग हुए। बंटवारे का धार्मिक आधार होने के बावजूद इस बंटवारे को धार्मिक में कहा जा सकता। मुसलमानों की एक बड़ी आबादी ने हिन्दुस्तान में ही रहने का चयन किया। तय यह हुआ था कि हिन्दू हो या मुसलमान उसके साथ बराबरी का व्यवहार किया जाएगा। लेकिन दुर्भाग्यवश समय बीतने के साथ दोनों तरफ कट्टरता बढ़ती चली गई। हिन्दुस्तान भी इसका अपवाद नहीं रहा। लोग मनुष्य होने की बजाय कुछ अधिक ही धार्मिक होते चले गए। आज स्थिति यह है कि अल्पसंख्यकों की एक बड़ी आबादी खौफजदा है। इस आबादी की बातों को अदनान ने तारतीबवार रखने की कोशिश की है।  युवा कवि अदनान कफील दरवेश का हाल ही में पहला कविता संग्रह राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अदनान ने अपने कथ्य और शिल्प के जरिए अदनान ने काव्य आलोचकों का ध्यान आकृष्ट किया है। आलोचक आशीष सिंह ने अदनान के इस नए संग्रह को आधार बनाकर उनके कविता कर्म की पड़ताल की है।  आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं  अदनान कफील दरवेश के  काव्य संकलन 'ठिठुर...

प्रेमकुमार मणि की समीक्षा आज़ादी के इर्द-गिर्द : चर्चा एक किताब की 

चित्र
आज़ादी के इर्द-गिर्द : चर्चा एक किताब की   प्रेम कुमार मणि   मैं आपको एक किताब के बारे में बताऊंगा, जिसे मेरी बेटी ने उपहारस्वरूप दी है। किताब का नाम है  - India Remembered. बेटी इतिहास पढ़ाती है और इतिहास के प्रति मेरे लगाव को शायद  समझती है;  इसीलिए उसने इस किताब को मेरे लिए चुना होगा। किताब पामेला मॉउन्टबेटन की लिखी है, जिसकी भूमिका उनकी बेटी इंडिया हिक्स ने लिखी है। किताब आज़ादी के इर्द -गिर्द की घटनाओं से आपको रू-ब-रू कराती है।   लेकिन सब कुछ जानने के लिए थोड़ी पृष्ठभूमि समझ लेना आवश्यक होगा। किताब की लेखिका पामेला, तत्कालीन गवर्नर जनरल लुइसअर्ल मॉउन्टबेटन और एडविना एश्ले की बेटी हैं। उनकी दो बेटियों में से एक, जो छोटी होने के कारण अपने माता-पिता के साथ तब दिल्ली में थीं। उनकी बड़ी बहन पैट्रिशिया विवाहित थीं। पामेला या पम्मी तब महज अठारह साल की थीं, लेकिन अपने पिता के कहे अनुसार लगभग नियमित डायरी लिखती थीं। एक चंचल-चित्त किशोरी दुनिया के इतने बड़े देश भारत के एक बड़े ऐतिहासिक मोड़ की चश्मदीद थी। वह अपने माता-पिता के साथ 22 मार्च 1947 को भारत पहुंची और 21 ...