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फोटो फीचर : अनिल जनविजय

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फोटो फीचर अनिल जनविजय अनिल जनविजय ने अपनी फेसबुक वाल पर इधर रोजाना पहेली के तरीके से कुछ चित्र लगा कर नाम पूछते हैं. इस महत्वपूर्ण सिलसिले में से कुछ चित्र पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत है. इस बार फोटो फीचर में कुछ चित्र अन्य मित्रों की फेसबुक वाल से भी साभार लिए गए हैं जिनका जिक्र चित्र के साथ है. यहाँ पर प्रस्तुत कुछ चित्र कैप्शन रहित हैं क्या आप इनमें कैप्शन भर सकते हैं? तो देर किस बात की कमेन्ट के खाने में बताइए ए हैं कौन?   (चित्र- 1 : महादेवी और सुमित्रानंदन पन्त; चित्र सौजन्य अरिंदम घोष)  (चित्र- 2 ; वंदना राग, ममता कालिया, चित्रा मुद्गल और उर्मिला शिरीष) (चित्र- 3; चित्रा मुद्गल और ममता कालिया) (चित्र- 4; प्रज्ञा रावत, रेखा कश्त्वार, डॉ आरती, सविता भार्गव) (चित्र- 5; देवीलाल पाटीदार, विनोद कुमार शुक्ल, मंज़ूर एहतेशाम, रेखा कस्तवार) (चित्र- 6; साधना अग्रवाल, भारत भारद्वाज, महेश कटारे, ध्रुव शुक्ल) (चित्र-7) (चित्र- 8; पीछे की पंक्ति में कुंवर रवीन्द्र, केशव तिवारी, बिमलेश त्रिपाठी; आगे की पंक्ति में दूसरे से कमलजीत चौ...

प्रतिभा गोटीवाले की कविताएँ

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प्रतिभा गोटीवाले कविता क्या है? महज शब्दों से खेल या शब्दों के जरिए अनकहे को कह देने का माध्यम । हर कवि अपने समय अपने लेखन में इस प्रश्न से अनायास ही टकराता है । और कविता के माध्यम से ही इसका जवाब खोजने या देने की कोशिश करता है । मानव मन की सहज अनुभूतियों को शब्दों में पिरोना भी आसान कहाँ? भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इसके लिए समय भी तो नहीं लोगों के पास । लेकिन कविता इसी मायने में हर विधा से अलग और अनूठी है कि आपाधापी में भी यह अपनी जगह बना लेती है । अनुभूतियों को आखिर कब तलक रोका जा सकता है । पानी से भी तेज इसका बहाव होता है । हमारी कवियित्री प्रतिभा गोटीवाले कविता लिखते लिखते हुए जैसे सहज ही शब्दों की अपार गहराईयों और संवेदनाओं की गहन परतों में उतरती चली जाती हैं ।   अपनी कविता 'अच्छा लगता है' में प्रतिभा लिखती हैं-  'बेबाक शब्दों में खुलना/ सहमे शब्दों में सिमटना/ अनकहे शब्दों को सुनना/ अबोले शब्दों का कहना/ बहुत अच्छा लगता है/ कभी कभी…… / यूँ ही ……/ शब्दों से खेलना ….।' तो आइए पढ़ते हैं प्रतिभा गोटीवाले की कुछ नयी कविताओं को । प्रतिभा गोटीवाले की य...

नीलाम्बुज सिंह की कविताएँ

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नीलाम्बुज सिंह बचपन में ही पहला उपन्यास 'चित्रलेखा' पढ़ा और कविता पढ़ी 'कुकुरमुत्ता'. यहीं से साहित्य के कीटाणु लग गए. डी . यू . से नजीर अकबराबादी की कविताओं   पर एम फिल कर चुकने के बाद जे . एन . यू . के भारतीय भाषा केंद्र से ' सामासिक संस्कृति और आज़ादी के बाद की हिंदी कविता ' पर पी - एच . डी . कर रहा हूँ . आजीविका के लिए अध्यापन करता हूँ.      कुछ फुटकर रचनाएँ ( शोध लेख , आलोचना , कवितायेँ , समीक्षाएं और रिपोर्ताज ) प्रकाशित   कविता क्या है? यह सवाल अक्सर कवियों को मथता रहा है. आज भी जब कोई युवा कवि कविता की दुनिया में प्रवेश करता है तो इस सवाल से टकराने की कोशिश करता है. कविता की दुनिया में नए युवा कवि नीलाम्बुज भी इसी क्रम में 'कविता आखिर कविता है दोस्त' शीर्षक से कविता लिखते हैं जिसमें वे बेबाकी से कहते हैं कि कविता और अनुशासन नहीं तो वह स्वच्छन्दता भी नहीं है. इसी क्रम में वे आगे लिखते हैं -  'आज़ादी है करुणा की !/ कविता विराग नहीं/ अनुराग है - / मनुष्य का मनुष्यता से/ जीव का जीवन से/ यह हार नहीं , विजय है/ विक...