राजकिशोर राजन की कविताएँ
राजकिशोर राजन दुःख और पीड़ा जब तक इस पृथिवी पर है तब तक बुद्ध का नाम भी जिन्दा रहेगा। एक कवि भी हमेशा इस दुःख और पीड़ा से संघर्ष करता है और इस तरह उस आम जन के पक्ष में खड़ा होता है जिसके दम पर इस दुनिया की हस्ती है। राजकिशोर राजन हमारे समय के ऐसे ही महत्वपूर्ण युवा कवि हैं जिन्होंने इन सवालों से टकराने की जद्दोजहद की है । इसकी आहट प्रत्यक्ष रूप से उनकी कविताओं में सुनी जा सकती है । पहली बार पर हम राजन की इसी अंदाज की कुछ नयी कविताएँ प्रस्तुत कर रहे हैं । तो आइए पढ़ते हैं राज किशोर राजन की नयी कविताएँ । कुशीनारा से गुजरते (बुद्ध की जीवनयात्रा पर आधारित कविताएं) राजकिशोर राजन राग अकस्मात् ही हुआ होगा कभी दबे पैर आया होगा ईर्ष्या-द्वेष घृणा-बैर आदि के साथ जीवन में राग फिर न पूछिए ! क्या हुआ ................... कुछ भी नहीं बचा बेदाग। दंगश्री पृथ्वी से ऊपर नहीं पृथ्वी पर ही है संभावना मुक्ति, आनंद की प्रेय और श्रेय की दंगश्री पर्वत की ओर उँगली उठा बुद्ध ने कहा था आकाश को और सदा से आकाश की ओर टकटकी लगाए मनुष्य को कहा लौटने को पृथ्वी पर दंगश्री, दंग है अब त...