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शशांक पाण्डेय की कविताएँ

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  शशांक पाण्डेय आगे बढना समय की ही नहीं जीवन की भी नियति है. मनुष्य आज इसीलिए दुनिया का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है कि उसने सामूहिकता की भावना के साथ अपने अर्जित ज्ञान को भविष्य की बेहतरी के लिए न केवल साझा किया है बल्कि उस परम्परा को लगातार आगे बढाया है. लेकिन प्रतिगामी विचार हमेशा उसके लिए चुनौतियाँ खड़ी करते रहते हैं. फिर भी मनुष्य इसीलिए मनुष्य है कि वह मुश्किल घड़ी में भी उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ता. युवा कवि शशांक पाण्डेय की कविताएँ इस परम्परा को आगे बढ़ाती दिखती हैं. वे नदी के उस रूपक के साथ आगे बढ़ते हैं जिसमें नदियाँ समय और जीवन का वाहक बन जाती हैं. शशांक लिखते हैं – ‘ नदियाँ निरंतर आगे ही बढ़ती रही है/ अपने सबसे बुरे दिनों में भी नदियाँ/ कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखी होंगी/ फिर सोचता हूँ/ दुनियाँ के सभी मनुष्यों को/ नदी की तरह ही हो जाना चाहिए/ हमेशा-हमेशा के लिये/ आगे की ओर जाने के लिये.’ कविता की दुनिया में इस नए नवेले कवि का यह पहला कदम है. कवि को इस कदम की मुबारकवाद देते हुए आज हम इनकी कविताओं से रु ब रु होते हैं. तो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं शशांक पाण्डेय की कविता...

शम्मी मिश्रा की कविताएँ

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शम्मी मिश्रा शम्मी लिखने पढ़ने की दुनिया में एकदम नया नाम है। हिन्दी से उनका इतना ही सम्बन्ध है कि वे मुझसे हिन्दी कविताएँ सुनते रहे हैं। वे कंप्यूटर की पढ़ाई करके फिलहाल एक नौकरी कर रहे हैं। यहाँ दी जा रही कविताएँ प्रेमाभिव्यक्ति हैं। उन्हें खूब जीवनानुभव मिलें। उन्हें पहला कदम मुबारक। -कमल जीत चौधरी युवा कवि कमल जीत चौधरी ने अपनी एक संक्षिप्त टिप्पणी के साथ बिल्कुल नए कवि शम्मी मिश्रा की कविताएँ उपलब्ध कराईं हैं। इन कविताओं में प्रेम के साथ-साथ एक एक पक्षधरता भी स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है। यह पक्षधरता कविता की उस रीढ़ की तरह होती है जो कवि के भविष्य का रास्ता निर्धारित करती है। 'परमात्मा भाग्य नहीं लिखता' एक बिल्कुल अलग किस्म की कविता है जिससे शम्मी के कवित्व और उनकी पक्षधरता को समझा जा सकता है ।   शम्मी का हिन्दी साहित्य संसार में स्वागत करते हुए और उन्हें पहले कदम की बधाई देते हुए हम आज उनकी कविताओं से आपको रु ब रु करा रहे हैं । तो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं शम्मी मिश्रा की बिल्कुल टटकी कविताएँ।               ...