शशांक पाण्डेय की कविताएँ
शशांक पाण्डेय आगे बढना समय की ही नहीं जीवन की भी नियति है. मनुष्य आज इसीलिए दुनिया का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है कि उसने सामूहिकता की भावना के साथ अपने अर्जित ज्ञान को भविष्य की बेहतरी के लिए न केवल साझा किया है बल्कि उस परम्परा को लगातार आगे बढाया है. लेकिन प्रतिगामी विचार हमेशा उसके लिए चुनौतियाँ खड़ी करते रहते हैं. फिर भी मनुष्य इसीलिए मनुष्य है कि वह मुश्किल घड़ी में भी उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ता. युवा कवि शशांक पाण्डेय की कविताएँ इस परम्परा को आगे बढ़ाती दिखती हैं. वे नदी के उस रूपक के साथ आगे बढ़ते हैं जिसमें नदियाँ समय और जीवन का वाहक बन जाती हैं. शशांक लिखते हैं – ‘ नदियाँ निरंतर आगे ही बढ़ती रही है/ अपने सबसे बुरे दिनों में भी नदियाँ/ कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखी होंगी/ फिर सोचता हूँ/ दुनियाँ के सभी मनुष्यों को/ नदी की तरह ही हो जाना चाहिए/ हमेशा-हमेशा के लिये/ आगे की ओर जाने के लिये.’ कविता की दुनिया में इस नए नवेले कवि का यह पहला कदम है. कवि को इस कदम की मुबारकवाद देते हुए आज हम इनकी कविताओं से रु ब रु होते हैं. तो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं शशांक पाण्डेय की कविता...