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आंचलिक लोकगीत: एक विश्लेषण

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अगर किसी भी जगह की खुशबू महसूस करनी हो तो वहाँ के लोकगीतों को जानने की कोशिश करिए । इसमें आपको एक साथ वहाँ की तमाम खुशबू मिल जायेगी । आज के समय में टेलीविजन, वीडियो और मोबाईल संस्कृति ने हमारे लोकगीतों को काफी क्षति पहुँचायी है । ऐसे में लोकगीतों को सुरक्षित-संरक्षित करने के यत्न जोर-शोर से किए जा रहे हैं । नीलिमा पाण्डेय और नलिन रंजन सिंह के सम्पादन में अभी-अभी लोकगीतों से सम्बंधित अत्यंत महत्वपूर्ण किताब आई है । इस किताब की हमारे लिए एक समीक्षा लिखी है इलाहाबाद के मशहूर युवा फोटोग्राफर कमल किशोर 'कमल' ने । तो आईये पढ़ते हैं यह समीक्षा ।               कमल किशोर ‘ कमल ’                                                                  ...

पूनम शुक्ला

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नाम - पूनम शुक्ला जन्म - 26 जून 1972, बलिया , उत्तर प्रदेश शिक्षा - बी ० एस ० सी० आनर्स ( जीव विज्ञान ), एम ० एस ० सी ० - कम्प्यूटर साइन्स ,एम० सी ० ए०। चार वर्षों तक विभिन्न विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षा प्रदान की ,अब कविता,गीत ,ग़ज़ल,लेख ,संस्मरण,लघुकथा लेखन मे संलग्न। कविता संग्रह " सूरज के बीज " अनुभव प्रकाशन , गाजियाबाद द्वारा प्रकाशित। "सुनो समय जो कहता है" ३४ कवियों का संकलन में रचनाएँ - आरोही प्रकाशन दैनिक जागरण,जनसत्ता दिल्ली, सनद,सिताब दियरा,पुरवाई,फर्गुदिया,बीईंग पोएट ईपत्रिका ,साहित्य रागिनी,विश्व गाथा,आधुनिक साहित्य,,जन-जन जागरण भोपाल,शब्द प्रवाह,जनसंदेश टाइम्स,नेशनल दुनिया,जनज्वार,सारा सच,लोकसत्य,सर्वप्रथम ,गुड़गाँव मेल,बिंदिया में रचनाएँ प्रकाशित। 'सृजन स्वतन्त्र है' क्योंकि यह स्वतन्त्रता बनाए रखने का दायित्व अभी तक रचनाकारों ने भलीभांति निभाया है. यही वजह है कि हर जमाने में साहित्य ने 'प्रतिरोध का संसार' रचने में  कोई कोताही नहीं बरती है. शुक्र है कि हमारी नयी पीढ़ी भी अपने इस दायित्व के प्रति पूरी तरह सजग है. इसी सजगता की ...

निर्मला तोंदी की कविताएं

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हमारे इर्द गिर्द तमाम घटनाएँ घटती रहती हैं. कुछ बाहर तो कुछ हमारे अन्दर. लेकिन इनको महसूस कर सकता है या तो एक संवेदनशील मन या फिर प्रकृति. इसके अन्तर्गत वे पेड़ पौधे भी आते हैं जो दुनिया भर का कष्ट सहन कर इस पृथ्वी और इस जीवन को बचाने का कार्य चुपचाप कर रहे हैं. कवि भी हमारे समाज का ऐसा ही संवेदनशील व्यक्ति है जो भौतिक सुख-सुविधाओं से इतर इस दुनिया जहान के बारे में सोचता रहता है. इस पृथ्वी और जीवन के बारे में सोचता रहता है. गरीबों के दुखों और उनके संघर्ष के बारे में सोचता रहता है. वह दुनिया को उसके यथार्थ से परिचित कराने का यत्न इस उम्मीद में करता है कि एक दिन सब बेहतर हो जाए और सुख शान्ति स्थापित हो. निर्मला तोंदी ऐसी ही एक कवियित्री हैं जो अपनी कविताओं में इसे महसूस करती हैं और इसे बाकायदा अपनी कविताओं में दर्ज करती हैं. तो आईए आज पढ़ते हैं निर्मला तोंदी की कुछ नयी कविताएँ.                       नया सीखा है इस सितम्बर के महीने में कुछ नया सीखा मैंने रोना सीखा अपनी बात अपने से कह के ...