राकेश कुमार गुप्त का आलेख 'भगत सिंह आज क्यों जरूरी हैं?'
भगत सिंह भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन के कई आयाम थे। एक तरफ गांधी जी जहां अहिंसा को केन्द्र में रख कर अपनी नीतियां बना रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी थे जो मानते थे कि बहरों को आवाज सुनाना जरूरी है। आश्चर्य होता है कि इतनी कम उम्र पाने के बावजूद भगत सिंह ने कितना कुछ पढ़ा लिखा था। उनके लेख और विचार पढ़ते हुए हम ताज्जुब से भर जाते हैं कि कितनी कम उम्र में ही वे धर्म की रूढ़ियों से बाहर निकल आए थे। इस क्रम में उनका आलेख 'मैं नास्तिक क्यों हूं' उनकी तार्किक क्षमता और प्रगतिशील सोच का अप्रतिम उदाहरण है। अपने आलेख में राकेश गुप्त लिखते हैं 'क्या राष्ट्र और सरकार एक ही चीज हैं? क्या सत्ता से असहमति राष्ट्र से असहमति है? और क्या देशभक्ति का प्रमाण सत्ता के प्रति निष्ठा है या देश के नागरिकों, संविधान और न्याय के प्रति निष्ठा? भगत सिंह की जयंती इन प्रश्नों को पूछने का अवसर है, क्योंकि भगत सिंह केवल एक शहीद नहीं थे; वे प्रश्न पूछने वाले, पढ़ने वाले, लिखने वाले और अपने समय की स्थापित धारणाओं को चुनौती देने वाले युवा थे।' आज भगत सिंह के जन्मदिन पर हम उनकी स्मृति ...