रुचि बहुगुणा उनियाल का संस्मरण 'राजा - पीलू'
रुचि बहुगुणा उनियाल एक समय था जब संयुक्त परिवार की प्रथा थी और घर के सदस्य ही नहीं पशु और पक्षियों को भी सदस्य का ही दर्जा प्राप्त होता था। उनको बेहतर तरीके से रखने की हर संभव कोशिश की जाती और उनके साथ उदारता दयालुता का व्यवहार किया जाता। गाय, भैंस, बैल जैसे जानवर हर घर में होते और उनकी बेहतरी का ध्यान रखा जाता। समय बदला और संयुक्त परिवार की प्रथा समाप्त हुई। लोग गांव से शहरों की ओर पलायन करने लगे जहां व्यक्ति के रहने की समस्या थी, जीव जानवर के लिए जगह के बारे में सोचा ही नहीं जा सकता। इन दिनों हम हर महीने के तीसरे रविवार को पहली बार पर रुचि बहुगुणा उनियाल के संस्मरण पढ़ रहे हैं अबकी बार प्रस्तुत है उनके संस्मरण की तीसरी कड़ी राजा पीलू। राजा-पीलू रुचि बहुगुणा उनियाल प्राप्ति-प्रियम गाड़ी में पीछे बैठे हुए हैं और हम लोगों को नवनीत जी सरप्राइज़ विजिट पर चकराता यात्रा पर ले कर जा रहे हैं। मैं नवनीत जी के बराबर वाली सीट में बैठी हुई हूँ.... नवनीत जी की नज़र सामने सड़क पर है और पूरा ध्यान ड्राइविंग पर लेकिन मेरी नज़र रास्ते के दोनों ओर की ...