कवि सुधीर सक्सेना पर नित्यानानद गायेन का आलेख 'कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं'
ईश्वर को आधार बना कर जिन कुछ कवियों ने महत्वपूर्ण कवितायें लिखीं हैं उनमें सुधीर सक्सेना का नाम प्रमुख है. इन कविताओं में वे ईश्वर से जैसे बातें करते हुए उसकी वास्तविकता को हमारे सामने रख देते हैं. उनकी कविताओं में प्रेम भरा पड़ा है. प्रेम जो मानवीय रिश्तों और संबंधों की बुनियाद है कवि के यहाँ बार-बार दिखाई पड़ता है. शायद इसीलिए नित्यानन्द ने इस आलेख का शीर्षक ही दिया है 'कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं ' कवि सुधीर सक्सेना के तीन संग्रहों को आधार बना कर युवा कवि नित्यानन्द गायेन ने यह आलेख लिखा है. इसे हम आप के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं .... साहित्य का एक तरुण विद्यार्थी हूँ मैं. मैंने अनेक रचनाकारों की रचनाएँ पढ़ी हैं. जिनमें साहित्य के दिग्गज और वरिष्ठ रचनाकारों के साथ समकालीन कवि भी शामिल हैं. समकालीन कवियों में अनेक हैं जिनकी रचनाएँ सदा मुझे आकर्षित करती हैं . जिनमें से एक हैं अग्रज कवि / लेखक/ अनुवादक सुधीर सक्सेना जी. और उन्हें पढ़ते हुए मैं उनके बहुत करीब आ गया हूँ. और वरिष्ठ कवि / सम्पादक...