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कवि सुधीर सक्सेना पर नित्यानानद गायेन का आलेख 'कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं'

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ईश्वर को आधार बना कर जिन कुछ कवियों ने महत्वपूर्ण कवितायें लिखीं हैं उनमें सुधीर सक्सेना का नाम प्रमुख है. इन कविताओं में वे ईश्वर से जैसे बातें करते हुए उसकी वास्तविकता को हमारे सामने रख देते हैं. उनकी कविताओं में प्रेम भरा पड़ा है. प्रेम जो मानवीय रिश्तों और संबंधों की बुनियाद है कवि के यहाँ बार-बार दिखाई पड़ता है. शायद इसीलिए नित्यानन्द ने इस आलेख का शीर्षक ही दिया है 'कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं ' कवि सुधीर सक्सेना के तीन संग्रहों को आधार बना कर युवा कवि नित्यानन्द गायेन ने यह आलेख लिखा है. इसे हम आप के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं.  कवि सुधीर सक्सेना. प्रेम के कवि, जो ईश्वर तो नहीं .... साहित्य का एक तरुण विद्यार्थी हूँ मैं. मैंने अनेक रचनाकारों की रचनाएँ पढ़ी हैं. जिनमें साहित्य के दिग्गज और वरिष्ठ रचनाकारों के साथ समकालीन कवि भी शामिल हैं. समकालीन कवियों में अनेक हैं जिनकी रचनाएँ सदा मुझे आकर्षित करती हैं . जिनमें से एक हैं अग्रज कवि / लेखक/ अनुवादक सुधीर सक्सेना जी. और उन्हें पढ़ते हुए मैं उनके बहुत करीब आ गया हूँ. और वरिष्ठ कवि / सम्पादक...

वाँन गॉग की पेंटिंग्स पर आशीष मिश्र का आलेख

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(चित्र : वान गाग) तारपीन तेल में सूरज को घोला मैंने आशीष मिश्र   वान गाग के अन्य तमाम चित्रों के बजाय मुझे ‘ गेहूँ के खेत ’ श्रृंखला  के चित्र ज़्यादा आकर्षित करते हैं । सम्भव है , इस इस आकर्षण के पीछे एक भारतीय किसान मन काम करता हो । वान ने इस श्रृंखला  के अधिकांश चित्र अपने जीवन के अंतिम दिनों में अर्ल और सेण्ट रेमी में बनाए थे , जब वह जीवन में सबसे ज़्यादा अकेला और टूटा हुआ ( जिन्हें वह कला के लिए सर्वाधिक ज़रूरी चीज़ मानता है ), फिर भी कहीं और गहराई से जीवन मूल से जुड़ा हुआ था । यह वही समय है , जब वह महीनों तक सेण्ट रेमी के मानसिक अस्पताल में पड़ा रहा और आश्चर्यचकित कर देने वाली वाली गहराई उसके चित्रों व पत्रों में मौजूद है । यह सब उसके चित्रों में पाये जाने वाले गाढ़े विरोधी रंगों की तरह है , जो उसके चित्रों गहराई देता है और उसके जीवन को लीजेंड्री बना देता है , जिस पर ‘ बेस्ट सेलर ’ उपन्यास लिखा जाता है और ...