हेमा दीक्षित की कविताएं
२१ जुलाई को कानपुर में जन्म.कानपुर विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक एवं विधि स्नातक। हिन्दी साहित्य एवं अंग्रेजी साहित्य लेखन में रूचि। विधिनय प्रकाशन, कानपुर द्वारा प्रकाशित द्विमासिक विधि पत्रिका 'विधिनय' की सहायक संपादिका। सम्प्रति, प्रबंध-निदेशक 'गौरी हॉस्पीटल', कन्नौज। आज के कविता की खूबसूरती यह है कि इसने अलग-अलग कोनों से बिलकुल अलग अलग ऐसी आवाजें उठाईं हैं जो बिलकुल हमारे आस-पास की आवाजें लगतीं हैं। इसमें आया सुख-दुःख, इसमें आया अवसाद, इसमें आयी समस्याएं बिलकुल अपनी समस्याएं लगतीं हैं। बिना किसी बनावट के बिलकुल सहज अंदाज में बुनी गयी ये कवितायें मन के अंदर गंभीर घाव करती हैं और हमें सोचने के लिए विवश करती हैं। हेमा दीक्षित स्त्री कवियों में ऐसा ही नाम है जिन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से स्त्री जीवन की विडम्बनाओं को करीने से उभारा है। उदाहरण के तौर पर ‘हरी हो मन भरी हो’ कविता में हेमा ने बिलकुल अदनी सी इलायची को बिम्ब के रूप में ले कर बड़ी खूबसूरती से स्त्री जीवन के यथार्थ को सहज अंदाज में उकेर दिया है। वह इलायची जिसे सिलबट्टे पर बार...