'पाश'

अवतार सिंह 'पाश'



 (गूगल के सौजन्य से) 





मैं अब विदा लेता हूँ




मैं अब विदा लेता हूँ ,
मेरी दोस्त ,मैं अब    विदा लेता हूँ
मैने एक कविता लिखनी चाही थी ,
सारी उम्र जिसे तुम पढती रह सकती ,
प्यार करना
... और लड़ सकना


जीने पे ईमान ले आना मेरी दोस्त यही होता है ,
धूप की तरह धरती पर खिल जाना
और फिर आलिंगन मे सिमट जाना
बारूद की तरह भड़क उठना
और चारो दिशाओं मे गूंज जाना
जीने का यही सलीका होता है ,
मेरी भी हिस्से की जी लेना ,मेरी दोस्त
मेरी भी हिस्से की जी लेना !!




सबसे खतरनाक
 


मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती


गद्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती
बैठे बिठाए पकडे जाना बुरा तो है
सहमी सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है
सबसे खतरनाक नहीं होता


कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना
मुट्ठियाँ भींच कर बस वक्त निकाल लेना बुरा तो है
सबसे खतरनाक नहीं होता.


सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शान्ति से मर जाना
तड़प का न होना
सब कुछ सहन कर जाना
घर  से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे खतरनाक वो घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी नजर में रुकी होती है


सबसे खतरनाक वो आँख होती है
जिसकी नजर दुनिया को मुहब्बत से चूमना भूल जाती है
और जो एक  घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है
सबसे खतरनाक वो गीत होता है
जो मर्सिये की तरह पढ़ा जाता है
आतंकित लोगों के दरवाजों पर
गुंडों की तरह अकड़ता है
सबसे खतरनाक वो चाँद होता है
जो हर हत्याकांड के बाद
वीरान हुए आँगन में चढ़ता है
लेकिन आपकी आँखों में
मिर्ची की तरह नहीं पड़ता


सबसे खतरनाक वो दिशा होती है
जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाये
और जिसकी मुर्दा धुप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाये

मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होती
गद्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती
            
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(गूगल के सौजन्य से) 

टिप्पणियाँ

  1. अप्रतिम कविता बधाई कवि और संपादक दोनों को

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  2. 'सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना.....सबसे खतरनाक वो दिशा होती है/ जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए'. सच में 'धरोहर' हैं ये कविताएं. आभार, साझा करने के लिए.

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  3. bahut teekhi kavitayen hain.. dil se nikli hain dil par chot karti hain.. shukriya santosh ji..

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