यश मालवीय के गजल संग्रह पर अनामिका सिंह की समीक्षा
कोई भी रचना समकालीन समकालीन यथार्थ को किसी न किसी तरह अभिव्यक्त करती है। यह समकालीनता ही उस रचना को सार्वभौमिकता प्रदान करती है। नवगीतकार यश मालवीय अपने गीतों और गजलों में लोक समस्याओं को करीने से उठाते हैं और अभिव्यक्त करते हैं। हाल ही में यश मालवीय का एक गजल संग्रह 'अनमने राम' प्रकाशित हुआ है। इसकी समीक्षा लिखी है युवा गजलकार अनामिका सिंह ने। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं यश मालवीय के गजल संग्रह पर अनामिका सिंह की समीक्षा। ' अनमने राम : दर्द वही अपना, जो दर्द है अवाम का' अनामिका सिंह 18 जुलाई 1962 को यश मालवीय ने लब्धप्रतिष्ठ कवि उमाकान्त मालवीय जी के पुत्र के रूप में जन्म लिया। गीत संसार में उमाकान्त मालवीय जी ने जो प्रसिद्धि और स्थान पाया था, उस विरासत को यश मालवीय ने जितनी शिद्दत से सहेजा, सँवारा, दुलारा वह दुर्लभ है। उनके लगभग दर्जन भर नवगीत संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। गीत उनके लिए साँस लेने जैसा है। शायद ही कोई विषय छूटा हो जिस पर उन्होंने गीत न लिखा हो। जीवन के हर पल को उन्होंने गीत में दर्ज़ किया है। लगभग उन्होंने हर विधा को समृद्ध किया, पर...