योहान वोल्फ़गांग फॉन गोएथे की कविताएँ (अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय)

Johann Wolfgang Von Goethe


र्मन कवि योहान वोल्फ़गांग फॉन गोएथे का जन्म 28 अगस्त 1749 को फ्रेंकफर्ट के एक संपन्न परिवार में हुआ योहान वोल्फ़गांग उनका नाम है और फॉन गोएथे सम्राट द्वारा दिया गया Title of Nobility है गोएथे को जर्मन भाषा का शेक्सपीयर माना जाता है वे बहुमुखी प्रतिभा संपन्न व्यक्तित्व के धनी थे कवि होने के अतिरक्त गोएथे नाटककार, उपन्यासकार, वैज्ञानिक, कलाकार, दार्शनिक और कानूनविद भी थे इसके साथ ही वे बहुभाषाविद भी थे ग्रीक, लैटिन, फ्रेंच, अंग्रेजी और इतालवी पर उनका असाधारण अधिकार था
गोएथे ने अपना प्रसिद्द नाटक फाउस्ट 24 वर्ष की आयु में लिखना प्रारम्भ कर दिया था, जिसे उन्होंने अपनी मृत्यु (22 मार्च 1832) से कुछ समय पूर्व ही पूरा किया यह नाटक दो भागों में है, इस नाटक का दूसरा भाग उनकी मृत्योपरांत प्रकाशित हुआ गोएथे ने यह नाटक कालिदास के अभिज्ञानशाकुंतलम नाटक का William Jones द्वारा किया गया अंग्रेजी अनुवाद पढने के बाद लिखा गोएथे इससे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने “नाटक में प्रस्तावना” को अपने इस नाटक में शामिल किया, जो जर्मन नाटकों के क्षेत्र में नई संकल्पना थी

गोएथे को सबसे पहले प्रसिद्धि अपने उपन्यास Die Leiden des jungen Werthers (युवा वेर्थर का दुःख) से मिली, जिसे उन्होंने 25 वर्ष की आयु में लिखा  लिखते ही इस उपन्यास का कई भाषाओं में अनुवाद हो गया इस उपन्यास के बारे में माना जाता है कि यह गोएथे की अपनी प्रेम दास्तां है इस उपन्यास का युवाओं पर इतना गहरा असर पड़ा कि दशकों तक प्रेम में असफल भावुक युवाओं ने इसे पढने के बाद आत्महत्या कर ली जिसके लिए गोएथे की काफी आलोचना भी हुई बाद में गोएथे ने स्वीकार किया कि स्वयं को बचाने के लिए उन्होंने अपने नायक की उपन्यास में हत्या कर दी अज्ञेय के “शेखर के एक जीवनी” पर भी इस उपन्यास की छाप मानी जाती है

गोएथे ने चार उपन्यास, लगभग 10000 पत्र, 3000 चित्र और अनेक कवितायेँ लिखीं मोत्सार्ट (Mozart), बीथोविन, शूबर्ट माहलर जैसे हर प्रसिद्ध जर्मन संगीतकार ने उनकी कविताओं को संगीतबद्ध किया है कवि के रूप में अपनी सफलता और प्रभाव के बावजूद गोएथे ने अपनी साहित्यिक उपलब्धियों पर कभी गर्व महसूस नहीं किया उनका मानना था कि दार्शनिक और वैज्ञानिक रूप में किया गया उनका काम ही उनकी असली विरासत हैं, विशेषकर 1810 में प्रकाशित उनकी कृति “Zur Farbenlehre” (=रंगों की परिकल्पना).

गोएथे जर्मन रोमांटिक युग Sturm und Drang के एक प्रमुख स्तम्भ हैं उनके एकाधिक स्त्रियों से प्रेम सम्बन्ध रहे, जो उनके चरित्र निर्माण में भागीदार रही हैं आज उनके जन्मदिन पर गोएथे की चुनिन्दा प्रेम कविताओं के जर्मन से हिन्दी अनुवाद का मैंने एक प्रयास किया है
- प्रतिभा उपाध्याय 

योहान वोल्फ़गांग फॉन गोएथे की कविताएँ
(अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय)

प्रिये के पास


तुम्हारे बारे में सोचता हूँ मैं, जब चमकता है सूरज
समुद्र से विकीर्ण होता हुआ
तुम्हारे बारे में सोचता हूँ मैं, जब चाँद की झिलमिलाहट  
दिखाई होती है झरनों में।

देखता हूँ तुम्हें मैं, जब दूर सड़क पर
उठती है धूल गहरी रात में,
जब संकरे पुल पर
कांपने लगता है पथिक।

सुनता हूँ तुम्हें मैं, जब एक क्षीण गर्जन के साथ
उमड़ पड़ती है लहर।
शांत कुञ्ज में अक्सर जाता हूँ मैं सुनने के लिए,
जब सब खामोश होता है।

तुम्हारे साथ हूँ मैं;
चाहे तुम कितना भी दूर हो,
मेरे नजदीक ही हो तुम !
सूरज, डूब रहा है
जल्द ही सितारे जगमगायेंगे मेरे ऊपर।
अरे, केवल तुम यहाँ हो!


नया प्यार नया जीवन


दिल, मेरा दिल, क्या कहना है इसे?
तुम इतना क्यों कसमसा रहे हो?
क्या ही अजीब है नया जीवन!
नहीं पहचानता मैं तुम्हें अधिक
चला गया सब कुछ, करते थे प्यार जिसे तुम
चला गया सब, दुखी क्यों हो रहे हो तुम?
चली गई तुम्हारी लगन और तुम्हारा अमन
ओह! कैसे बच निकले तुम उससे!

आकर्षित करता है नवयौवन तुम्हें
यह सुन्दर रूप
विश्वास और दया से परिपूर्ण यह दृष्टि
अनंत शक्ति से भरी?

मैं बचाना चाहता हूँ स्वयं को इससे ज़ल्दी ही
मुझे धमकाती है यह , उसे मुक्त करती है
बाहर ले जाती है मुझे एकदम
ओह! मेरा पथ उसी की ओर वापस!

और यह जादुई धागा,
इसे नहीं किया जा सकता अलग
बांधे रखता है यह प्रेम को, लापरवाह लड़कियों को
अनायास ही जकड रखा है इसने मुझे कस कर
जीना है मुझे इसके जादुई चक्र में
अब केवल उसके ही तरीके से
परिवर्तन, ओह, कितना विशाल!
प्यार! प्यार! जाने दो मुझे!



वर्तमान

हर चीज़ करती है तुम्हारी ही तारीफ़
उदित होता है दैदीप्यमान सूर्य
अनुसरण करोगी शीघ्र ही तुम, ऎसी आशा करता हूँ मैंI

जब कदम रखती हो उपवन में तुम
तब होती हो गुलाबों का गुलाब
साथ ही कुमुदनियों की कुमुदनीI

जब हिलती हो तुम नृत्य में
तो हिलते हैं तारे सारे
तुम्हारे साथ और तुम्हारे चारों ओरI

रात! और तब यह रात ही हो  
चंद्रमा को दे रही हो मात तुम चमक में
प्यारी रोमांचक चमकI

रोमांचक और प्यारी हो तुम
और फूल चाँद और तारे,
सूर्य, पूजा करते हैं केवल तुम्हारीI

सूर्य! ऎसी बनो तुम मेरे लिए भी
सर्जक आलीशान दिनों की
यही है जीवन और अमरत्व !!



कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, जानता नहीं मैं  

कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मैं नहीं जानता।

देखता हूँ केवल एक बार तुम्हारा चेहरा  
,
देखता हूँ तुम्हारी आँखों में केवल एकबार

आज़ाद हो जाता है मेरा दिल हर दर्द से


भगवान जानता है , कैसी बीत रही है मुझ पर

कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मैं नहीं जानता।

 

तड़प

'नहीं होगा यह आखरी आंसू,
जो चमकते हुए दिल को भारी कर देता है
जो अकथनीय नए दर्द से
अपने बढे हुए दर्द को शांत करता हैI

ओ, तुम हमेशा वहां रहती हो
मुझे शाश्वत प्रेम का अहसास कराने के लिए 
और चाहती हो दर्द भी बना रहे
नसों और शिराओं को खरोंचने के लिएI   

काश! एक बार भी मैं,
तुमसे भरा जा सकूँ, ओ अनन्त, -
ओह, यह लंबी, गहरी पीड़ा,
कैसे रह लेती है इस धरा पर!


केवल वह, जो तड़प जानता है

केवल वह, जो तड़प जानता है, 
वही जानता है कि कितना तडप रहा हूँ  मैं!
अकेला और अलग थलग,
सारे आनंद से दूर,
क्षितिज को देखता हुआ 
हर तरफ.
 
ओह! जो प्यार करता है मुझे और जानता है, 
सुदूर है वह.
चकरा रहा हूँ मैं
जल रही हैं अंतडियां मेरी.
केवल वह, जो तड़प जानता है, 
वही जानता है कि कितना तडप रहा हूँ मैं !

(चयन और अनुवाद - प्रतिभा उपाध्याय)

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