सीमस हीनी की कविताएँ : अनुवाद सरिता शर्मा

सीमस हीनी
(Seamus Heaney)

(जन्‍म : 13 अप्रैल 1939; मृत्‍यु 30 अगस्त 2013)

बीसवी शताब्‍दी के सबसे मशहूर कवियों में सीमस हीनी का नाम गिना जाता है. वे मशहूर आयरिश कवि, अनुवादक, नाटककार एवं प्रवक्‍ता थे. उनका चौदह काव्‍य संग्रह, चार गद्य संग्रह एवं दो नाटक प्रकाशित हुए हैं. अपने पहले कविता संग्रह 'डेथ ऑफ़ ए नेचुरलिस्ट' से ही इन्होने साहित्य जगत में अपनी एक मुकम्मल जगह बना ली. हीनी आक्‍सफोर्ड विश्‍वविद्यालय में कविता के प्रोफेसर थे. कुल सोलह पुरस्‍कारों से पुरस्कृत जिनमें प्रमुख हैं ई. एम. फोस्‍टर पुरस्‍कार, आयरिश पेन पुरस्‍कार, टी. एस. एलियट प्राइज, डेविड कोहन पुरस्‍कार. वर्ष 1995 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार हीनी को दिया गया.  

सीमस हीनी की कविताओ में प्रकृति के साथ-साथ तत्‍कालीन समाज एवं राजनैतिक गतिविधियां द्रष्‍टव्‍य हैं. देहाती जीवन के ताने बाने से बुनी उनकी कविताएं एक अलग तेवर की हैं.

Lovers on Aran

The timeless waves, bright, siftingbroken glass,
dazzling around, into the rocks,
Came glinting, sifting from the Americas

To posess Aran. Or did Aran rush
to throw wide arms of rock around a tide
That yielded with an ebb, with a soft crash?

Did sea define the land or land the sea?
Each drew new meaning from the waves' 
Sea broke on land to full identity. 

आरान द्वीप पर प्रेमी

कालातीत लहरें, उज्ज्वल,  धूप को छानते, टूटे शीशे,

चट्टानों के चारों ओर

चमकते आते हैं अमेरिका से

 आरान पर कब्ज़ा जमाने. या आरान दौड़ता है

चट्टान की विशाल बाँहों में ज्वार को भरने

जो झुक जाता है भाटे में धीरे से टकरा कर?

समुद्र ने जमीन को परिभाषित किया या पृथ्वी ने समुद्र को?

दोनों को नया अर्थ मिला लहरों के टकराने से.
सागर जमीन से मिला पूरी समरसता से.


A rowan like a lipsticked girl.
Between the by-
road and the main road
Alder trees at a wet and 
dripping distance
Stand off among the 

There are the mud-
flowers of dialect
And the immortelles of 
perfect pitch
And that moment when the bird sings very close
To the music of what happens.


लिपस्टिक लगाये पहाड़ी पेड़ रोवन सी एक लड़की.

खड़ी है उपमार्ग और सड़क के बीच
थोड़ी दूर है गीला टपकता एल्डर वृक्ष
खड़ा है हड़बड़ी से परे.
बोली के पंकिल फूल हैं और सही स्वरमान की अमरता
और पक्षी गाता है उस क्षण
जो घटित होता है उसके संगीत के अनुरूप. 

Requiem for the Croppies

The pockets of our greatcoats full of barley...
kitchens on the run, no striking camp...
We moved quick and 
sudden in our own country.
The priest lay behind ditches with the 
A people hardly marching... on the hike...
We found new tactics happening each day:
We'd cut through reins and rider with the pike
And stampede cattle into infantry,
Then retreat through hedges where cavalry must be thrown.
Until... on Vinegar 
Hill... the final conclave.
Terraced thousands died, shaking scythes at cannon.
The hillside blushed, soaked in our broken wave.
They buried us without shroud or coffin
And in August... the barley grew up out of our grave. 

क्रोपीज के लिए शोकगीत

जौ से भरी थी हमारे चोगों की जेबें

न रसोई चलानी थी  न हड़ताली शिविर

हम अपने ही देश में अचानक घुसे फुर्ती से.

खाइयों के पीछे भिखारी के पास हमारा अगुआ पुजारी पड़ा हुआ है.

मुश्किल से चल पाने वाले लोगों की तादाद बढ़ रही थी .

हम हर दिन देखते थे नई रणनीति

बर्छे लिए बागडोर और सवार के बीच से रास्ता बनाते थे

और पदसेना में पशुओं की भगदड़ मची,

फिर लौट गए बाड़ों में जहाँ घुड़सवार सेना को ठूंसा जाना था

तब तक ... जब तक विनिगर हिल पर ... गुप्त सभा नहीं हुई

तोपों की ओर हंसिये लहराने वाले हजारों लोगों को कतारों में मारा गया

पहाडी की ढलान लज्जित थी  हमारे खून की लहर में लथपथ

हमें दफनाया उन्होंने कफन या ताबूत के बिना और अगस्त में

हमारी कब्र में जौ उगे.

Rite of Spring

So winter closed its fist
And got it 
stuck in the pump.
plunger froze up a lump

In its 
throat, ice founding itself
Upon iron. The handle
Paralysed at an angle.

Then the twisting of wheat straw
ropeslapping them tight
Round stem and snout, then a light

That sent the pump up in a flame
It cooled, we lifted her latch,
Her entrance was wet, and she came. 


वसंत का अनुष्ठान

सर्दियों ने अपनी मुट्ठी कस ली और उसे पंप में फंसा दिया

गोताखोर ने ढेर को बर्फ से ढंक दिया

अपने गले में, बर्फ ने गलाया खुद को लोहे पर.

हत्था  एक कोण पर ठप्प हो गया.

फिर गेहूं के तिनकों को मरोड़ कर बुनी रस्सियां

उन्हें जोर से कसा तने और थूथन के चारों ओर,

और फिर आग सुलगायी जिसने पंप में लौ पहुंचाई

 वह ठंडा हुआ हमने उसकी कुंडी को उठाया
पम्प प्रवेश द्वार गीला था और भेद्य था.


My father worked with a horse-plough,
His shoulders globed like a full sail strung
Between the shafts and the furrow.
The horse strained at his clicking tongue.

An expert. He would set the wing
And fit the bright steel-pointed sock.
The sod rolled over without breaking.
At the headrig, with a single pluck

Of reins, the sweating team turned round
And back into the land. His eye
Narrowed and angled at the ground,
Mapping the furrow exactly.

I stumbled in his hob-nailed wake,
Fell sometimes on the polished sod;
Sometimes he rode me on his back
Dipping and rising to his plod.

I wanted to grow up and plough,
To close one eye, stiffen my arm.
All I ever did was follow
In his broad shadow round the farm.

I was a nuisance, tripping, falling,
Yapping always. But today
It is my father who keeps stumbling
Behind me, and will not go away.


मेरे पिता ने घोड़ा हल चलाया

उनके कंधे तने हुए पाल जैसे झुक जाते थे

मूठ और खांचे के बीच. घोड़ा तन जाता

उनकी लगातार चलती चलती जुबान सुन कर .

वह विशेषज्ञ थे

विंग बना कर चमकदार स्टील जुराब फिट करते थे

मिटटी को लुढ़का देते थे बिना तोड़े

 घोडा गाडी पर एक बार उठा कर.

बागडोर सँभालते और मेहनतकश टोली

फिर से मुड जाती जमीन की ओर

उनकी आंख सिकुड़ कर जमीन पर झुक जाती

 हल रेखा का सही अनुमान लगाते हुए.

मैंने उनके कील वाले रास्ते में ठोकर खाई

कभी कभार गिरा चमकीली मिटटी पर  

कभी कभी मुझे अपनी पीठ पर बिठाया उन्होंने

घिसट कर चलते हुए नीचे ऊंचे मार्ग पर .

मैं चाहता था बड़ा होकर हल चलाना

एक आँख बंद करके,  हाथ कस लेना.

मैंने बस अनुगमन किया

खेत के आसपास उनकी व्यापक छत्रछाया में.

मैं बेकार, ठोकर खाकर गिरने वाला था,

हमेशा बकबक करने वाला

लेकिन आज मेरे पिता हैं जो लड़खड़ा कर चलते हैं

 मेरे पीछे और दूर नहीं जा पायेंगे 



ई-मेल : sarita12aug@hotmail.com

मोबाईल : 09871948430


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