पाश

 


अनुवाद- यादवेन्द्र शर्मा



अब मैं विदा होता हूँ






अब मैं विदा होता हूँ मेरी दोस्त!
मैं अब विदा होता हूँ
मैंने एक कविता लिखनी चाही थी
तूं  जिसे सारी गुनगुनाती रहती



उस कविता में महकते हुए धनिए का जिक्र होना था.
गन्नों की सरसराहट का जिक्र होना था.
और कोंपलों की नाजुक शोखी का जिक्र होना था
उस कविता में पेड़ों से लिपटती धुंधों का जिक्र होना था.
और बालटी में चुए दूध के झागों का जिक्र होना था.
और जो भी कुछ
मैंने तेरे जिस्म में देखा
उस सब का जिक्र होना था.
उस कविता में मेरे हाथो के खुरदुरेपन को मुस्कुराना था
मेरी जांघों की मछलियों को तैरना था.
और मेरी छाती के बालों के नरम शाल में से
ताप की लपटें उठनी थीं.



उस कविता में
तेरे लिए
मेरे लिए
और जिंदगी के सारे सम्बन्धों के लिए
बहुत कुछ होना था मेरी दोस्त!



पर बड़ा ही बेस्वाद है
इस दुनिया के उलझे हुए नक़्शे के साथ निबटना.
अगर मैं लिख भी लेता
वह शगुनों भरी कविता
तो उसको यूँ ही दम तोड़ देना था
तुझे और मुझे छाती पर बिलखते छोड़ के



मेरी दोस्त कविता बहुत ही निसत्व हो गयी है
जब की हथियारों के नाखून बुरी तरह बढ़ आये हैं
अब हर तरह की कविता के पहले
हथियारों से युद्ध करना जरूरी हो गया है.



युद्ध में
हर चीज को बड़ी आसानी से समझ लिया जाता है
अपना या दुश्मन का नाम लिखने की तरह
तब इस हालत में
चूमने के लिए बढे हुए मेरे होठों की गोलाई को
धरती के आकार की उपमा
या तेरी कमर के लहराने को
समुद्र के सांस लेने की उपमा देना
बड़ा मजाक सा लगना था
अतः मैंने ऐसा कुछ नहीं किया
तुझे,
तेरी मेरे घर में बच्चों को खेला सकने की तमन्ना को
और युद्ध की सम्पूर्णता को
एक ही कतार में खडा करना मुझसे संभव नहीं हुआ
अतः अब मैं विदा होता हूँ



मेरी दोस्त! हम याद रखेंगे
कि दिन के वक्त लुहार के भट्ठी की तरह तपतें हैं
जो हमारें गाँव के टीले
वे रात को फूलों की तरह महक उठते हैं
हम याद रखेंगे कि चांदनी में सराबोर
ईख की पत्तियों पर लेट के
स्वर्ग को गाली देना बड़ा संगीतमयी होता है
हाँ! यह हमें याद रखना ही होगा क्योंकि
जब दिल की जेबों में कुछ नहीं होता
यादें बहुत ही सुखदाई लगती हैं.



मैं इस विदाई की बेला में धन्यवाद देना चाहता हूँ.
उन सारी सुन्दर चीजों को
जो हमारें मिलन के वक्त तम्बू की तरह तनी रहीं
और उन जगहों को भी
जो हमारी मुलाकात के वक्त खूबसूरत हो गयीं
मैं आभारी हूँ
अपने सर पर ठहर जाने वाली
तेरी तरह धीमी और गीतों भरी हवा का
तेरे इंतजार में जो मेरा मन लगाये रही
मैं धन्यवाद करना चाहता हूँ
बीड़ पर उगी उस रेशमी घांस का
जो तेरी ठुमकती हुई चाल के आगे बिछ गया
मैं धन्यवाद करना चाहता हूँ
तिन्दियों से गिरी हुई कपास के फूलों का
जिन्होंने कभी कोई ऐतराज नहीं किया
और सदा मुस्कुरा के हमारें लिए सेज बन गये
धन्यवाद करना चाहता हूँ
गन्नों पर तैनात नन्हीं चिडियों का
जिन्होंने आने जाने वाले की भनक रखी
धन्यवादी हूँ
जवान हुई गेहूं का
जो हमें बैठे न सही, लेटे हुए तो ढकती रही
मैं आभारी हूँ सरसों के नन्हे फूलों का
जिन्होंने मुझे इश्क में कई बार दिया मौका

तेरे बालों से पराग झाडने का
मैं मनुष्य हूँ बहुत कुछ छोटी चीजों से बना हूँ
मैं धन्यवादी हूँ
उन सारी चीजों का जिन्होंने मुझे बिखरने से बचाए रखा
मैं उन सबका ऋणी हूँ


प्यार करना बड़ा सहज है
जैसे कि जुल्म को सहते हुए
खुद को लड़ाई के लिए तैयार करना
या कि जैसी अज्ञातवास में, लगी हुई गोली के बाद
किसी वीरान झोपड़ी में पड़े रह कर
जख्म भरने वाले दिन की कल्पना करना
प्यार करना और लड़ के मर जाना
जीने पर ईमान ले आना, मेरी दोस्त! यही सब कुछ होता है.



धूप की तरह धरती पर खिल जाना
और फिर बाँहों में सिमट जाना
बारूद की तरह भड़क उठाना
चारो दिशाओं में गूँज जाना
जीने का यही सलीका होता है.



प्यार करना और जीना उन्हें कभी नहीं आने वाला
जिन्हें जिन्दगी ने साहूकार बना डाला
जिस्मों का रिश्ता समझ सकना
खुशी और नफरत के बीच  कभी लकीर न खीचना
जिन्दगी के फैले हुए विस्तार से प्रेम करना
सन्नाटे को चीर     के मिलना और विदा होना
बहादुरी का कम होता है मेरी दोस्त
अब मैं विदा होता हूँ.



तुम भूल जाना
कि मैंने किस चाव से तुम्हे पलकों के भीतर पल के जवान किया था.
कि मेरी नजरो ने क्या कुछ नहीं किया
तेरे नैन नक्शों को और भी आकर्षक बनाने में
कि मेरे चुम्बनों ने कितना सुन्दर कर दिया तेरा चेहरा
कि मेरे आगोश ने तेरा मोम जैसा शरीर नए सांचे में ढाला.
तुम यह सब भूल जाना मेरी दोस्त




बस इतना याद रखना
कि मुझे जीने की बड़ी तमन्ना थी
कि मैं गले तक जिन्दगी में डूब जाना चाहता था
तुम मेरे हिस्से का भी जी लेना मेरी दोस्त
मेरे हिस्से का भी जी लेना मेरी दोस्त
मेरे हिस्से का भी जी लेना.

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