विश्व सिनेमा पर विमल चन्द्र पाण्डेय का आलेख “मैप ऑफ़ द ह्यूमन हार्ट” : अद्भुत संयोगों से भरी अद्भुत प्रेम कहानी



विश्व के विभिन्न देशों में बनी कुछ महत्वपूर्ण फिल्मों पर पैनी नजर डाली है हमारे कवि-कहानीकार मित्र विमल चन्द्र पाण्डेय नेविमल की फिल्मों में भी काफी रूचि और दखल है। इन दिनों वे कुछ अच्छी फ़िल्में बनाने के क्रम में मुम्बई जैसी मायानगरी में संघर्ष कर रहे हैं। वे इस संकल्प के साथ मुम्बई गए हैं कि वहाँ वे साफ़-सुथरा काम करेंगे न कि बेसिर-पैर की फिल्मों और धारावाहिकों पर। पहली प्रस्तुति के क्रम में न्यूजीलैंड के निर्देशक विन्सेंट वार्ड की फिल्म ‘द मैप ऑफ द ह्यूमन हार्टस की चर्चा प्रस्तुत है विश्व सिनेमा पर एक सिलसिलेवार प्रस्तुति पढ़ सकेंगे  
  
विमल चन्द्र पाण्डेय


“मैप ऑफ़ द ह्यूमन हार्ट” : अद्भुत संयोगों से भरी अद्भुत प्रेम कहानी

बचपन में अपनी पाठ्य पुस्तक में एस्किमो बालक नाम का एक चैप्टर पढ़ा था जिसमे पहली और आखिरी बार सील और वौलरस नाम के जीवों की तसवीरें देखीं थीं और इग्लू के बारे में जाना था कुछ तस्वीरों में कई एस्किमो बालक स्लेज की सवारी कर रहे थे स्लेज यानि एक ऐसी गाड़ी जिसे कुत्ते खींचते हैं बहुत अच्छा लगा था लेकिन उस उम्र में यह भी लगा था की यह ज़रूर किसी दूसरी दुनिया की बात है ऐसे लोग ऐसे माहौल में रहते होंगे जो वाकई इंसान होंगे जो हमारी तरह सोचते होंगे और हमारे जैसी भावनाएं रखते होंगे ये मानने को दिल तैयार नहीं था और तब तक नहीं था जब तक न्यूजीलैंड के निर्देशक विन्सेंट वार्ड की फिल्म ‘द मैप ऑफ द ह्यूमन हार्टस’ नहीं देखी थी अपनी कुछ कमियों के बावजूद यह फिल्म सिर्फ इसलिए देखी जानी चाहिए क्योंकि यह अपने शानदार कैमरावर्क के साथ आपको ऐसी दुनिया में ले जाती है जहाँ हिंदी फिल्में हमें बहुत बेईमानी से सिर्फ कुछ देर के लिए ले गयी हैं और वह भी इसलिए कि वहाँ जा कर हमारे नायक नायिका एक दूसरे को बर्फ के गोले बना कर मार सकें और एक मधुर गाने की गुंजाईश निकाली जा सके


       एविक नाम का एस्किमो बालक ट्यूबरकुलोसिस नाम की बीमारी से ग्रसित है और दृश्य १९३१ में कनाडियन उत्तरी ध्रुव का है वह आधा गोरा और आधा एस्किमो है मैपिंग यानि नक़्शे बनाने वाले कुछ लोग वहाँ आये हैं और उनका यह काम एविक को बहुत आकर्षित करता है वाल्टर रसेल नाम का गोरा उसकी बीमारी के बारे में जान कर उसकी दादी को बताता है की इस लड़के को गोरों वाली बीमारी है और उसे गोरों वाली ही दवाई चाहिए एविक की दादी के ये तर्क कि यह कोई पुराना श्राप है, या घर में एविक के अलावा कोई मर्द नहीं है या एविक को एक बड़ा शिकारी बनना है, वाल्टर के सामने नहीं चलते और वह एविक को लेकर उसका इलाज कराने अपने साथ ले जाता है, वहाँ एविक को एक स्कूल में भारती किया जाता है जहाँ एक कड़क टीचर मिलती है जो बताती है कि सबको अच्छा बनना चाहिए और जन्नत में जाना चाहिए नहीं तो बुरे कर्म करने वाले लोग; प्रोटेस्टेंट लोगों कि तरहद्ध नरक में जाते हैं, वह एविक से कहती है, मुझे पता है तुम्हारे पिता गोरे थे इसलिए तुम्हें थोड़ी अंग्रेज़ी ज़रूर आती होगी एविक सहमति में सिर हिलाता है वह पूछती है, ‘हमें बताओ तुम्हें अंग्रेज़ी में क्या आता है, एविक सोच कर धीरे से बोलता है, “चाक.... कलेक्ट...” ये दो शब्द सुनकर टीचर खुश होती है और कहती है, “बहुत अच्छा?... और आगे।“ उत्साहित एविक अपना अंग्रेज़ी का सारा ज्ञान उड़ेल देना चाहता है और मुस्कुराता हुआ बोलता है, ‘होली बॉय, फक यू’ टीचर उसे मारती है और क्लास के सभी बच्चे उसे पोटैटो फेस कह कर चिढ़ाते रहते हैं ‘ओ बॉय’ और ‘होली काऊ’ को मिला कर वह ‘होली बॉय’ कहता है जो पूरी फिल्म में उसकी पहचान के तौर पर प्रयोग हुआ है सबसे अधिक चिढ़ाने वालों में से एक लड़की एल्बर्टीन है जो गोरे और भारतीय माता पिता की संतान है और उसे हाफ ब्रीड के ताने सुनने पड़ते हैं एविक और उस लड़की में एक अनोखा रिश्ता विकसित होता है जिसमे दोनों कभी जानवरों की तरह लड़ने लगते हैं और कभी अचानक पागलों कि तरह हँसने लगते हैं एविक का एल्बर्टीन के कंधे पर बैठ कर अपने घर को देखने की कोशिश करने वाला दृश्य बहुत मार्मिक है जिसमे वह कहती है कि वह अपने पिता का इंतज़ार कर रही है और उसे उम्मीद है की वह उसके लिए एक घोड़ा लेकर आएंगे एविक कहता है कि उसके पिता नहीं आएंगे और इस पर एल्बर्टीन उसे अपने कंधे से नीचे पटक देती है एविक उससे कहता है की वह उसे अपने घर लेकर जायेगा तो वह कहती है कि इंडियन लोग बर्फ में नहीं रह सकते एविक आश्चर्य से पूछता है कि क्या वह इंडियन है? वह कहती हैं हाँ और एविक उस पर टूट पड़ता है क्योंकि एस्किमो लोग इंडियन्स से नफरत करते हैं ऐसे ही छोटी छोटी बातों पर वो लड़ते हैं और फिर अचानक हँसने लगते हैं टीचर को उनकी शैतानियाँ रास नहीं आतीं और वह एल्बर्टीन को अलग कर देती है

 
       फिल्म आगे बढ़ती है और इस बार 1941 के दृश्य में बड़ा एविक दिखाई पड़ता है जिसकी बीमारी ठीक हो गयी है और वह अपने घर वापस आ चुका है उसके दोस्त उसे हवा में उछाल रहे हैं और फिर से एक जहाज़ दिखाई पड़ता है एविक की एक दोस्त कहती भी है कि एविक जब भी हवा में जाता है हवाई जहाज़ लेकर वापस आता है इस बार भी वाल्टर मैपिंग करने आया है  वाल्टर उसे बताता कि युद्ध छिड़ा हुआ है और एविक पूछता है कि हम किस ओर से लड़ रहे हैं? वाल्टर बताता है कि हम इंग्लैंड की ओर से जर्मनी के खिलाफ लड़ रहे हैं एविक जब अगली बार दिखाई देता है तो वह बमबारी करने वालों के साथ एरियल फोटोग्राफर बन चुका होता है यहाँ उसकी मुलाकात फिर से एक बार एल्बर्टीन से होती है और उसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहता लेकिन उसकी खुशी तब हवा हो जाती है जब उसे पता चलता है की वाल्टर के साथ बंध चुकी है वाल्टर से उसने एल्बर्टीन के लिए उसके सीने का एक्स-रे भेजा था जो देने के बाद दोनों करीब हो गए एल्बर्टीन कहती है कि जब वह एक्स-रे देने वाल्टर आया था तो वह बहुत खूबसूरत लग रहा था लेकिन दरअसल बात यह कि एल्बर्टीन हाफ ब्रीड के ताने सुनकर तंग आ चुकी है और उसे अब किसी हाफ ब्रीड से शादी करके जिंदगी भर के लिए ताने नहीं सुनने वह अपने लिए एक गोरा इंसान चाहती थी इसलिए उसने वाल्टर का साथ स्वीकार कर लिया। 


       युद्ध के दौरान एविक की फोटोग्राफी के दृश्य और इस बहाने शानदार कैमरा वर्क का नूमना फिल्म की जान है फिल्म के अंत में एल्बर्टीन की बेटी अपने पिता को ढूंढती हुई आती है और एविक से मिलती है फिल्म के दो दृश्य फिल्म को एक अलग ऊंचाई प्रदान करते हैं पहला है एक बड़े गुब्बारे के ऊपर एल्बर्टीन और एविक का प्रेम दृश्य ऐसा प्रेमालाप किसी फिल्म में नहीं दिखाया गया और कई मायनों में बहुत सुन्दर बन पड़ा है बचपन में एल्बर्टीन ने एविक को अपने सीने के ऑपरेशन का निशान दिखाया था और इस बार एविक उसके टॉप के बटन खोलते हुए कहता है की हम वहीँ से शुरु करेंगे जहाँ पिछली बार हमें अधूरा छोड़ा था फिल्म का अंतिम दृश्य भी बहुत भावुक कर देने वाला है जहाँ बदहाल एविक बर्फ की एक चट्टान पर गिरा हुआ है और युवा एविक एल्बर्टीन को एक गुब्बारे में ले कर उसी चट्टान के ऊपर से गुजार रहा है दो मोड़ो वाला यह अंत कहानी को एक दार्शनिक स्पर्श देता है यह कोई युद्ध आधारित फिल्म नहीं है और ना ही यह कोई एस्किमो की जिंदगी के बारे में बताने वाली कथाए यह एक ऐसी प्रेम कहानी है जिसमे समझौते की दुनियावी मजबूरियां शामिल हैं एल्बर्टीन को हाफ ब्रीड कहलाये जाने से नफरत है और इसके लिए वह वाल्टर का साथ मंजूर करती है लेकिन प्रेम वह एविक से ही करती है


        एविक अपने स्थान को छोड़ कर कहीं नहीं जाना चाहता उसे लगता है कि वो खराब नसीब वाला है और जहाँ भी जाता है उसकी बदकिस्मती उसके साथ चलती है फिल्म दो घंटे से भी कम अवधि में एक लंबे कालखंड को समेटती है और कहीं कहीं बोझिल भी लगने लगती है कलाकारों का अभिनय बहुत सहज है और कुछ दृश्य बहुत बेहतरीन और भावुक करने वाले हैं कुल मिलाकर यह फिल्म अपने शानदार दृश्यों के कारण यादगार बन गयी है








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टिप्पणियाँ

  1. इस समीक्षा ने इसे देखने की ललक मन में भर दी | तलाशते हैं इसे |

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