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अच्युतानंद मिश्र

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संध्या नवोदिता

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कवि ,अनुवादक ,व्यंग्य लेखक और पत्रकार , छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका ,छात्र- जीवन से सामाजिक राजनीतिक मुद्दों पर लेखन , आकाशवाणी में बतौर एनाउंसर -कम्पीयर जिम्मेदारी निभाई . समाचार-पत्र,पत्रिकाओं ,ब्लॉग और वेब पत्रिकाओं में लेखन..  . 
कर्मचारी राजनीति में सक्रिय, कर्मचारी एसोसियेशन में दो बार अध्यक्ष .जन आन्दोलनों और जनोन्मुखी राजनीति में दिलचस्पी.

स्त्रियाँ चाहें जहाँ और जिस भी समाज की हों, उनकी स्थिति कमोबेश एक जैसी ही है। इसीलिए उन्हें दलितों में भी दलित कहना अनुचित नहीं। हमारे बीच की कुछ कवियित्रियों ने अपनी रचनाओं में अब उन उत्पीड़नों को, उस आपबीती को बताने का साहस किया है। सन्ध्या नवोदिता वह कवियित्री हैं जिनकी रचनाओं में बिना किसी हल्ले-गुल्ले के वह स्त्री स्वर अभिव्यक्त होता है जो अन्यत्र दुर्लभ है। उनमें स्वीकार का साहस है तभी तो वे यह कहने से नहीं हिचकतीं कि 'संतृप्त/ऊबे हुए मेरे साथी पुरुष/अब कुछ बचा ही नहीं/ तुम्हारे लिए/जहाँ/जिस दुनिया में/चीज़ें शुरू होती हैं/वहीं से/मेरे लिये।' इस आत्मविश्वास के चलते ही संध्या और कवियित्रियों से अलग खड़ी नजर आती हैं।  पहली …