हितेन्द्र पटेल का आलेख 'बिपन चंद्र के बारे में सोचते हुए'
बिपन चन्द्र कुछ किताबें मील का पत्थर होती हैं। वे इतनी जरूरी होती हैं कि उनके बिना एक समय को मुकम्मल तरीके से जानना दिक्कत तलब हो सकता है। आधुनिक भारत के इतिहास की जब भी बात आती है 'इंडियाज़ स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस' का नाम आवश्यक तौर पर लिया जाता है। इसके लेखक बिपन चन्द्र, मृदुला मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, सुचेता महाजन और के ए पणिक्कर हैं। लेकिन इसके लेखक के तौर पर मुख्य तौर पर प्रायः बिपन चन्द्र का नाम ही लिया जाता है। बिपन चन्द्र ने अपनी इस किताब में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और गांधी जी के आंदोलनों को एक नए परिप्रेक्ष्य में देखने की कोशिश की है। हितेन्द्र पटेल से हमने अनहद के लिए बिपन चन्द्र पर एक स्मृति आलेख लिखवाया था। हाल में उन्होंने उस आलेख का पुनर्लेखन किया है। अपने आलेख में हितेन्द्र लिखते हैं 'गांधी के नेतृत्व में आंदोलन ने जनसाधारण को राजनीतिक बनाया, औपनिवेशिक शासन की वैधता को क्रमशः कमजोर किया, संघर्ष और विराम की लय के माध्यम से संगठन की शक्ति बचाए रखी और स्वतंत्रता के विचार को विस्तृत सामाजिक स्वीकृति दी। 'इंडियाज़ स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस' इसी दृष्टि ...